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पीएमओ के पांच सबसे बड़े अफसरों को कितनी मिलती है सैलरी, जानिए

Executive Enclave: 95 साल के इतिहास को बदलते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय अब आधुनिक सुविधाओं और अभेद्य सुरक्षा वाले नए 'एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव' में शिफ्ट हो गया है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बीच पीएम मोदी के साथ काम करने वाले अजीत डोभाल और पीके मिश्रा जैसे देश के शीर्ष 5 अफसरों की सैलरी और पावर भी सुर्खियों में है।

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भारत

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MI Zahir

Feb 13, 2026

PMO New Building Top officials

प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत और शीर्ष अधिकारी। (फोटो: AI)

PMO New Building : : देश और दुनिया में भारत का नया प्रधानमंत्री कार्यालय चर्चा का विषय है। पहले प्रधानमंत्री के समय से ही रायसीना हिल्स के साउथ ब्लॉक में चल रहे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का पता बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीएमओ अब नए बने 'एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव' में शिफ्ट (PMO India New Address) हो रहा है। यह बदलाव महज एक इमारत का नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल से आधुनिक भारत की ओर एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही, लोगों में यह जानने की उत्सुकता है कि पीएम के साथ काम करने वाले देश के 'सुपर 5' अफसरों को कितनी सैलरी मिलती है। ध्यान रहे कि पुराना पीएमओ (साउथ ब्लॉक) 1930 के दशक में ब्रिटिश आर्किटेक्ट हरबर्ट बेकर ने डिजाइन किया था। आजादी के बाद से यही देश का सबसे शक्तिशाली कार्यालय रहा। वहीं, नया पीएमओ 'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट' के तहत बनाया गया है। इस नए परिसर के निर्माण का टेंडर करीब 1,189 करोड़ रुपये में दिया गया था। इसे DEC इंफ्रास्ट्रक्चर ने रिकॉर्ड समय में तैयार किया है। यह इमारत सुरक्षा के लिहाज से एक अभेद्य किला है।

देश के 5 सबसे ताकतवर अफसर और उनकी सैलरी (Top Bureaucrats Salary):

  1. डॉ. पी.के. मिश्रा (प्रधान सचिव)

प्रधानमंत्री के सबसे करीबी और भरोसेमंद अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा गुजरात कैडर के 1972 बैच के आईएएस हैं। वे पीएमओ में प्रशासनिक और नीतिगत मामलों के मुखिया हैं। आपदा प्रबंधन में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञता हासिल है। पीएम के हर बड़े फैसले में इनकी सलाह शामिल होती है।

सैलरी: वे कैबिनेट सेक्रेटरी रैंक (लेवल-18) के अधिकारी हैं। इनकी फिक्स सैलरी 2,50,000 रुपये (मासिक) है। चूंकि वे रिटायर्ड हैं, इसलिए पेंशन की राशि समायोजित की जाती है। इसके साथ सरकारी आवास और गाड़ी की सुविधा मिलती है।

2.शक्तिकांत दास (प्रधानमंत्री के ​​प्रिंसिपल सेक्रेटरी-2)

पीएम के साथ इनका तालमेल सबसे अहम है। वे 1980 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और नोटबंदी के दौरान आर्थिक मामलों के सचिव थे। वर्तमान में वे प्रधानमंत्री के ​​प्रिंसिपल सेक्रेटरी-2 हैं।

सैलरी: वेतन 2,50,000 रुपये (मासिक) है। इसके अलावा मुंबई में आधिकारिक आवास मिलता है।

3.अजीत डोभाल - NSA (Ajit Doval Salary)

भारत के 'जेम्स बॉन्ड' कहे जाने वाले अजीत डोभाल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर धारा 370 हटाने तक, हर बड़े सुरक्षा मिशन के पीछे इनका दिमाग रहा है। वे सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं।

सैलरी: इनका दर्जा भी कैबिनेट मंत्री स्तर का है। इन्हें भी लेवल-18 के तहत 2,50,000 रुपये (मासिक) वेतन और शीर्ष स्तर की सुरक्षा सुविधाएं मिलती हैं।

  1. तरुण कपूर (सलाहकार, पीएमओ)

हिमाचल प्रदेश कैडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी तरुण कपूर पीएमओ में ऊर्जा, तेल और बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों को देखते हैं। वे पूर्व में पेट्रोलियम सचिव रह चुके हैं। सोलर एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

सैलरी: ये भारत सरकार के सचिव रैंक (लेवल-17) पर हैं। इनका मूल वेतन 2,25,000 रुपये (मासिक) है। इन्हें भी ए-क्लास सरकारी सुविधाएं प्राप्त हैं।

  1. आतिश चंद्रा (अतिरिक्त सचिव, पीएमओ)

आतिश चंद्रा 1994 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। पीएमओ में आने से पहले वे भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सीएमडी थे। वे कृषि, खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों का काम देखते हैं। पीएमओ की फाइलों के सुचारू निपटारे में इनका बड़ा योगदान है।

सैलरी: ये अतिरिक्त सचिव स्तर (लेवल-15) के अधिकारी हैं। इनका वेतनमान 1,82,200 से 2,24,100 रुपये के बीच होता है। डीए और अन्य भत्ते मिलाकर ग्रॉस सैलरी काफी अधिक बनती है।

नई इमारत की खासियत

इसमें पीएम आवास और संसद भवन तक जाने के लिए सुरक्षित अंडरग्राउंड टनल है। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक 'ग्रीन बिल्डिंग' है, जो भूकंपरोधी भी है। अगले 48 घंटों में पीएमओ के सभी संवेदनशील दस्तावेज और सर्वर नए भवन में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। पुराने साउथ ब्लॉक को अब 'युगे युगीन भारत' नामक राष्ट्रीय संग्रहालय (Museum) में बदलने की योजना पर काम शुरू होगा। नई बिल्डिंग की सबसे बड़ी चर्चा इसकी 'सीक्रेट टनल' है। अब प्रधानमंत्री को संसद जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग नहीं करना पड़ेगा, जिससे वीआईपी रूट के कारण दिल्ली की आम जनता को लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।