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गरीबों को महंगाई कूपन, AI से नौकरी, मित्र कपड़ा योजना, सालाना 78.5 लाख नौकरी, जानिए आर्थिक सर्वेक्षण की 10 बड़ी बातें

Economic Survey 2024 : जीडीपी वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 से सात प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। 2030 तक सालाना 78.5 लाख नौकरियों की दरकार पर रहेगा सरकार का फोकस रहेगा। आइए जानते हैं आर्थिक सर्वेक्षण की 10 बड़ी बातें

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देश में बढ़ते कार्यबल को देखते हुए गैर-कृषि क्षेत्र में 2030 तक सालाना 78.5 लाख नौकरियां सृजित करने की जरूरत है। लोकसभा में सोमवार को पेश 2023-24 के आर्थिक सर्वे में कहा गया कि कामकाजी उम्र में हर कोई नौकरी की तलाश नहीं करेगा। कुछ खुद का रोजगार करेंगे और कुछ नियोक्ता होंगे। सर्वे के अनुमानों को देखते हुए आने वाले समय में सरकार का फोकस रोजगार के अवसर बढ़ाने पर रहेगा।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश सर्वे में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 6.5 से सात प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद जताई गई। इसमें कहा गया कि देश का फाइनेंशियल सेक्टर आउटलुक उज्ज्वल रहेगा। आर्थिक वृद्धि को देखते हुए नौकरियों से ज्यादा अवसर पैदा करने होंगे। इसके लिए सभी स्तर पर सरकारों और निजी क्षेत्र को मिलकर प्रयास करना होगा। कार्यबल में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटकर 2047 में 25 प्रतिशत रह जाएगी, जो 2023 में 45.8 प्रतिशत थी।

आर्थिक सर्वे में सुझाव दिया गया कि गैर-कृषि क्षेत्र में हर साल 78.5 लाख नौकरियों की मांग में पीएलआइ योजना (5 साल में 60 लाख रोजगार सृजन), मित्र कपड़ा योजना (20 लाख रोजगार सृजन) और मुद्रा जैसी मौजूदा योजनाएं पूरक भूमिका निभा सकती हैं। यह सुझाव भी दिया गया कि राज्य सरकारें अनुपालन बोझ कम कर और भूमि पर कानूनों में सुधार कर रोजगार सृजन में तेजी ला सकती हैं।

महंगाई पर गरीबों को कूपन देने का सुझाव

सर्वे में कहा गया कि आरबीआइ को नीतिगत दर तय करने में खाद्य वस्तुओं की महंगाई पर गौर करना बंद करना चाहिए। गरीबों पर खाने के सामान की ऊंची कीमतों का असर कम करने के लिए सरकार को उन्हें ‘कूपन’ देने या सीधे नकदी हस्तांतरण पर विचार करना चाहिए। हाल के महीनों में महंगाई दर में कमी आई है, लेकिन आरबीआइ ने बढ़ी हुई खाद्य मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए नीतिगत दर में कटौती से परहेज किया। इस दर के आधार पर ही बैंक आवास, व्यक्तिगत और कंपनी ऋण का ब्याज तय करते हैं। सर्वे के मुताबिक प्राय: खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें मांग के बजाय आपूर्ति की समस्या के कारण होती हैं।

आर्थिक सर्वे 2024 की खास बातें

  • भारत की ग्रोथ स्टोरी में कैपिटल मार्केट प्रमुख भूमिका निभा रहा है। देसी स्टॉक मार्केट वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक झटकों के बीच जुझारू बना हुआ है।
  • देश के फाइनेंशियल सेक्टर में महत्त्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। इस सेक्टर को वैश्विक या स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली संभावित चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
  • भू-राजनीतिक तनाव और उसका प्रभाव आरबीआइ की मौद्रिक नीति के रुख को प्रभावित कर सकता है।
  • कंपनियों और बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होने से निजी निवेश को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
  • चीन से एफडीआइ निवेश बढऩे से भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
  • विदेश में बसे भारतीयों ने 2024 के दौरान देश में 124 अरब डॉलर का रेमिटेंस भेजा। साल 2025 में इसके 129 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान।
  • मानसून सामान्य रहने की उम्मीद। आयात की जाने वाले प्रमुख वस्तुओं की वैश्विक कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर आरबीआइ और आइएमएफ के अनुमान दुरुस्त नजर आते हैं। आरबीआइ ने चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है।

बजट आज, विकसित भारत के सपनों वाला होगा : मोदी

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को बजट पेश करेंगी। सोमवार को मानसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, यह अमृत काल का महत्त्वपूर्ण बजट है। जब 2047 में आजादी के 100 साल होंगे, तब विकसित भारत का जो हमारा सपना है, उसे पूरा करने की मजबूत नींव वाला बजट लेकर हम देश के सामने आएंगे। मोदी ने कहा, यह मेरे और सभी साथियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि करीब 60 साल के बाद कोई सरकार तीसरी बार वापस आए और तीसरी पारी का पहला बजट रखने का सौभाग्य प्राप्त हो। देश इसे लोकतंत्र की अत्यंत गरिमापूर्ण घटना के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हित में रचनात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा, दल के लिए जितनी लड़ाई लडऩी थी, लड़ ली। अब आने वाले पांच साल हमें देश के लिए लडऩा है, देश के लिए एक और नेक बनकर जूझना है।

हिंदी में बजट भाषण संसद टीवी-2 पर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार को सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट भाषण 2024-25 अंग्रेजी में पढ़ेंगी। संसद टीवी चैनल संख्या-1 पर अंग्रेजी भाषा में ही बजट भाषण का सीधा प्रसारण होगा। हिंदी में बजट भाषण सुनने के लिए संसद टीवी चैनल संख्या-2 पर रिमोट कंट्रोल के ज़रिए सेट-टॉप बॉक्स की भाषा सेटिंग्स में जाकर नेविगेट करना होगा। वहां हिन्दी भाषा का चुनाव करने से हिन्दी में बजट भाषण सुना जा सकेगा।

AI से नौकरी आएगी तो जाएगी भी

एआइ के कारण अगले पांच वर्षों में 23 फीसदी नौकरियों में बदलाव होने का अनुमान है। इसमें कुछ नौकरियों में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि होगी। लेकिन, अन्य में 12.3 प्रतिशत की गिरावट भी आएगी।

गिग इकोनॉमी का तेजी से उदय

गिग इकोनॉमी ने रोजगार परिदृश्य में बदलाव ला दिया है। 2029-30 तक गिग वर्कफोर्स के 2.35 करोड़ तक बढ़ने की उम्मीद है, जो गैर-कृषि कार्यबल का 6.7 फीसदी और कुल कार्यबल का 4.1 फीसदी होगा।

कृषि रोजगार में बढ़ेगी महिला भागीदारी

महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 23.3 फीसदी से बढ़कर 2022-23 में 37 फीसदी हो गई है। ग्रामीण महिलाओं के कारण यह भागीदारी बढ़ी है। कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र इस भागीदारी को और बढ़ा सकता है।

हरित रोजगार की संभावना

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार बढ़ने की संभावना है। हरित ऊर्जा विकल्पों को अपनाने से 2030 तक 34 लाख नौकरियां (अल्पकालिक और दीर्घकालिक) पैदा हो सकती हैं।