
जम्मू कश्मीर के डोडा में भारतीय सेना के जवानों पर हुआ हमला आम नहीं है। ये घात लगाकर किया गया हमला है। सेना के जवान आधुनिकतम बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट से लैस थे। सिर्फ उनके चेहरे ही खुले थे और आतंकियों ने जवानों के चेहरों को निशाना बनाया। इससे एक बात साफ हो जाती है कि यह आतंकी जंगल युद्ध में प्रशिक्षित हैं व बेहतरीन निशानची भी हैं। गौरतलब है कि सोमवार आतंकी हमले में एक कैप्टन समेत सेना के चार और जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वीर जवान की मौत हुई है।
रक्षा विशेषज्ञों ने डोडा मुठभेड़ को लेकर तीन तथ्यों को रेखांकित किया है। सबसे पहली बात यह कि यह आतंकी विदेशी मूल के हैं। दूसरा इन्हें जंगल में छिपने, घात लगाने व निशाना बनाने का प्रशिक्षण हासिल है। तीसरा यह कि ये आतंकी 99 फीसदी पाकिस्तानी पूर्व सैनिक हो सकते हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह आतंकियों का फिदायीन दस्ता नहीं ही है। ये तकनीक फिदायीन दस्तों की होती ही नहीं है।
पाकिस्तान से आए आतंकी हाइटेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। बातचीत के लिए चीनी सैटेलाइट का प्रयोग कर रहे हैं तो हमले को लाइव दिखाने के लिए बॉडीकैम भी लगा रखे हैं। कठुआ में सेना की गाड़ी पर हुए हमले में इसका इस्तेमाल सामने आया है।
डोडा आतंकी हमला 15 जवानों के गश्ती दल पर हुआ हमला था। यह दल आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहा था। इसी दौरान आतंकियों ने घात लगाकर हमलाकर दिया। इसमें सेना के कैप्टन सहित चार जवान शहीद हो गए। यह आधुनिकतम बुलेट-प्रूफ जैकेट और हेलमेट पहने हुए थे लेकिन उनका चेहरा खुला हुआ था। आतंकियों ने इसे ही निशाना बनाया।
जम्मू का इलाका नदियों वाला है और पाकिस्तान सीमा पर कई नाले हैं जो मानसून में उफान पर रहते हैं। इस रास्ते से आतंकियों को घुसपैठ करने का बेहतरीन मौका मिल जाता है। इसके अलावा जम्मू संभाग में पहाड़ ऐसे इलाके उपलब्ध कराते हैं जहां छिपने के कई स्थान हैं और वहां ड्रोन संचालित करने की भी बेहद कम संभावना रहती है।
इस हमले की जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद से जुड़े हुए आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली है। यह कश्मीर टाइगर्स वही आतंकवादी संगठन है जिसने हाल ही में भारतीय सेना के काफिले पर हुए हमले की भी जिम्मेदारी ली थी। कश्मीर टाइगर्स को पाकिस्तान से हथियार और धन मुहैया कराया जाता है।
Updated on:
17 Jul 2024 03:03 pm
Published on:
17 Jul 2024 03:02 pm
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