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UCC विधेयक पर जमीयत का विरोध कहा- शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार्य नहीं, मुस्लिमों को मिलनी चाहिए छूट

Uniform Civil Code Bill: मौलाना मदनी ने कहा कि हमें शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार्य नहीं है। साथ ही कहा कि किसी भी धर्म को मानने वाला अपने धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकता।

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Uniform Civil Code

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यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर आज से उत्तराखंड विधानसभा में बहस शुरू हो रही है। इसी बीच मुस्लिम संगठनों ने इस बिल का विरोध शुरू कर दिया है। मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने UCC विधेयक को भेदभाव का आरोप लगाया है। मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार्य नहीं है। साथ ही कहा कि अगर अनुसूचित जनजाति को विधेयक के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, तो फिर मुस्लिम समुदाय को छूट क्यों नहीं मिल सकती।

शरीयत के खिलाफ कोई कानून नहीं करेंगे स्वीकार्य- मौलाना

मौलाना मदनी ने कहा कि हमें शरीयत के खिलाफ कोई कानून स्वीकार्य नहीं है। साथ ही कहा कि किसी भी धर्म को मानने वाला अपने धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकता। बता दें कि उत्तराखंड विधानसभा में पेश किए गए समान नागरिक संहिता विधेयक में अनुसूचित जनजातियों को संविधान के प्रावधानों के तहत नए कानून में छूट दी गई है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की गई है।

यूसीसी पर भेदभाव का लगाया आरोप

जमीयत प्रमुख ने कहा कि संविधान के एक अनुच्छेद के तहत अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से अलग रखा गया है। ऐसे में हमें संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धर्म की आजादी क्यों नहीं मिल सकती। मौलाना ने दावा किया कि समान नागरिक संहिता मौलिक अधिकारों को नकारती है। यह समान नागरिक संहिता है ऐसे में नागरिकों के बीच यह भेदभाव क्यों हो रहा है।

इन जनजातियों को रखा ‘समान नागरिक संहिता' बिल से बाहर

प्रदेश में रह रही अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। यूसीसी विधेयक को पारित कराने के लिए बुलाये गए विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन पेश समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड-2024 विधेयक में धर्म और समुदाय से परे सभी नागरिकों के लिए तलाक, विवाह, संपत्ति, उत्तराधिकार जैसे मामलों पर एक समान कानून प्रस्तावित हैं।
बता दें कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा राज्य विधानसभा में मंगलवार को बहुप्रतीक्षित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश किया गया। इसमें बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं को आपराधिक कृत्य बनाने तथा लिव-इन-रिलेशन में रह रहे जोड़ों के बच्चों को जैविक बच्चों की तरह उत्तराधिकार दिए जाने का प्रावधान है।

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