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कश्मीर की बहन ने सुनाई भाई के मौत की कहानी, आतंकियों का किया विरोध तो साहिल को मार दी गोली

Anantnag Encounter : घाटी की हवा ही नहीं अब मिजाज भी बदलने लगा है। अब आतंकियों से सुरक्षाबल ही नहीं स्थानीय युवा भी सीधे भिड़ रहे है।

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Anantnag Encounter : घाटी की हवा ही नहीं अब मिजाज भी बदलने लगा है। अब आतंकियों से सुरक्षाबल ही नहीं स्थानीय युवा भी सीधे भिड़ रहे है। सुरक्षाबलों पर पत्थर नहीं फेंके जा रहे हैं बल्कि उनकी शहादत पर आतंकियों के लिए काला झंडा फहरा रहा है। आतंकियों समर्थन में कौमी नारे नहीं बल्कि यहां की लड़कियां सवाल उछाल रही हैं कि आखिर कश्मीर में दहशतगर्दों का आतंक कब तक सहन करना होगा। आतंकी यह सवाल बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में अब वह स्थानीय लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। 2023 में इसका पहला शिकार बना है अनंतनाग का साहिल...

4 अक्टूबर। अनंतनाग का वत्रिगाम वानिहामा इलाका। शाम ने उजाले को आगोश में लेना शुरू कर दिया था कि 11वीं के छात्र साहिल बशीर डार को भूख लग गई। वह अपनी बहन के कमरे से निकलकर अम्मी से खाने के लिए पूछा तो अम्मी ने जवाब दिया सब नमाज पढ़ रहे हैं। नमाज अदा होते ही खाना बनाएंगे।

मां और बेटे के बीच चल रहा बातचीत का यह सिलसिला खत्म हुआ भी नहीं थी कि दो आतंकी घर में घुस जाते हैं। कहासुनी के बाद आतंकी साहिल को सिर में गोली मार देते हैं। आतंकी घर के बाहर भी फायरिंग करते हैं। आतंकियों के जाने के बाद साहिल को अस्पताल पहुंचाया जाता है और वहां वह दम तोड़ देता है।

आतंकियों ने नमाज भी न पूरी करने दी

बेहद गमी के बीच नम आंखों से पूरे इलाके के लोग ने गुरुवार को सुपूर्द ए खाक किया है। साहिल की मौत से पूरे इलाके में शोक है। सभी की जुबां पर सिर्फ एक ही सवाल है कि आखिर इसमें साहिल का क्या कसूर था और क्यों उसे खाने की जगह गोली मिली? यहां तक की कौम की बात करने वाले आतंकियों ने नमाज तक पूरे नहीं होने दी।

कोई मदद करने नहीं आया
साहिल की बहन बुधवार की घटना पूरा ब्यौरा देते हुए बताती हैं कि पिता और भाई नमाज पढ़ने मस्जिद गए थे। घर में वह, मां और साहिल थे। मां और वह नमाज पढ़ रही थी। इसी बीच साहिल ने खाना मांगा। अभी खाने की बात खत्म भी न हुई थी कि दो नकाबपोश घर में घुस गए। मां और उसने शोर मचाना शुरू किया और साहिल ने एक को पकड़ लिया। इस पर दूसरे नकाबपोश ने पिस्टल उठाकर साहिल को गोली मार दी और बाहर फायरिंग करते हुए भाग गए।

अपने कमरे में भी डर लगता है
मां बाहर लोगों से मदद के लिए गुहार लगा रही थी। घर से बाहर मदद के लिए जाती तो कभी खून से लथपथ भाई के पास आती। गोलियों की आवाज सुन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। भाई तड़पता रहा। वह भगाती हुई मस्जिद गई और पिता को सूचना दी। फिर उसे अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन साहिल नहीं बच पाया। साहिल की बहन कहती है कि आखिर कब तक हम ऐसे घुट घुट जीते रहेंगे। हमें अपने ही घर में डर लगता है कि कहीं कोई वहां बंदूकधारी न हो।