
देशभर में जनमाष्टमी मनाई जा रही है (Photo- IANS)
Janmashtami 2025: देशभर में आज जनमाष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन भक्त पूरा दिन व्रत रखते हैं और रात को भगवान कृष्ण की आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। शनिवार को वृंदावन और मथुरा सहित पूरे भारत में कृष्ण जन्माष्टमी की उमंग दिख रही है। वृंदावन में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है और यहां की जन्माष्टमी बहुत ही खास होती है। देश में श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर भक्तों के लिए आध्यात्मिक केंद्र हैं, जहां उनकी लीलाओं और कथाओं का जीवंत चित्रण देखने को मिलता है। आइए जानते है भगवान श्रीकृष्ण के कौन-कौन से भव्य मंदिर है…
वृंदावन को श्रीकृष्ण की लीलाभूमि माना जाता है। वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर भक्ति और वास्तुकला का अनुपम संगम है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह राधा-कृष्ण और सीता-राम की मूर्तियों से सुशोभित है। रात में रंग-बिरंगी रोशनी और संगीतमय फव्वारे इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
कर्नाटक में भगवान कृष्ण के इस मंदिर को 13वीं सदी में बनाया गया था। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के पास एक तालाब है। इसके पानी में मंदिर का प्रतिबिंबन नजर आता है। वहीं मंदिर के आसपास आठ मठ हैं, जो दो-दो वर्षों के लिए मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं।
पुरी का जगन्नाथ मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित चार धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ (कृष्ण), बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं। 12वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर की रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें लाखों भक्त भाग लेते हैं। मंदिर की वास्तुकला और धार्मिक महत्व इसे अद्वितीय बनाते हैं।
द्वारका में स्थित द्वारकाधीश मंदिर एक प्राचीन तीर्थ स्थल है। चालुक्य शैली में निर्मित यह मंदिर समुद्र तट के किनारे अपनी भव्यता बिखेरता है। मंदिर का 78 मीटर ऊंचा शिखर और 72 स्तंभों वाला सभागृह इसे विशेष बनाता है।
देशभर में कई जगहों पर श्रीकृष्ण के इस्कॉन टेंपल है। वृंदावन के इस्कॉन टेंपल का निर्माण 1975 में हुआ था। इस मंदिर में भक्तों की पूरे साल भीड़ जमा रहती है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर तो यहां का नजारा और भी भव्य होता है।
Updated on:
16 Aug 2025 03:50 pm
Published on:
16 Aug 2025 03:50 pm
