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जवान बेटे की लाश लाने के लिए बेचनी पड़ी जमीन, रुला देगी झारखंड के इस बेबस पिता की कहानी

Jharkhand News: जवान बेटे की मौत किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ी दुख की बात होती है। यदि परिवार सक्षम है तो कुछ दिनों में बेटे की मौत के गम को झेल जाता है। लेकिन गरीब परिवार के लोगों के लिए जवान बेटे की मौत पूरे परिवार को जीते-जी मौत के करीब ला देती है। ऐसे ही एक परिवार से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। जहां एक जवान बेटे की मौत के बाद उसकी लाश लाने के लिए पिता को जमीन बेचनी पड़ी।

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Jharkhand: Father Sold Land to bring Dead Body of his son from Maharashtra to Garhwa

Jharkhand News: घर खर्च चलाने के लिए जवान बेटे ने परदेश जाकर कमाने का विचार किया था। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। कमाई के लिए घर से कोसों दूर आए उस युवक की बीमारी के चलते मौत हो गई। मौत के बाद उसके लाश को घर तक लाने के लिए पिता को जमीन बेचनी पड़ी। मानवता को झकझोड़ देने वाली यह घटना झारखंड से सामने आई है। बेबस पिता और उसके परिवार की कहानी जानकर आपकी आंखें भी नम हो जाएगी। दरअसल यह कहानी है झारखंड के गढ़वा जिले की। गढ़वा झारखंड की राजधानी रांची से करीब 205 किलोमीटर दूर है। गढ़वा न तो बहुत विकसित है और ना ही बहुत पिछड़ा। एक सामान्य जिले जैसी हैसियत रखने वाले गढ़वा के घघरी गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। दरअसल गढ़वा जिले के सगमा प्रखंड के घघरी निवासी नारायण यादव को अपने जवान बेटे की लाश को मंगवाने के लिए जमीन बेचनी पड़ी।

बेबस पिताः न बेटा बचा और न जमीन

मिली जानकारी के अनुसार, घघरी निवासी नारायण यादव का 32 साल का बेटा योगेंद्र यादव कुछ दिन पहले ही रोजी-रोटी की तलाश में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में गया था। उसने सोलापुर की एक कंपनी में मजदूरी का काम भी शुरू कर दिया था। जिससे उसके परिवार में खुशी का माहौल था। बीबी-बच्चों, पिता सहित अन्य लोगों को लग रहा था कि अब बेटे की कमाई से हमारे भी दिन बहुरेंगे। लेकिन समय ने इस परिवार को ऐसा कंगाल बनाया कि अब न तो बेटा बचा न जमीन।


सोलापुर में पड़ा बीमार, इलाज के दौरान मौत


दरअसल सोलापुर में मजदूरी के दौरान योगंद्र यादव बीते दिनों बीमार पड़ा। पहले उसने आस-पास के डॉक्टरों से इलाज कराया। फिर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुआ। लेकिन उसकी जान नहीं बची। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। योगेंद्र की मौत के बाद उसके पिता बेटे की लाश घर लाने की कोशिश में जुटे। उन्होंने योगेंद्र के साथियों के साथ-साथ कंपनी से मदद मांगी। लेकिन उन्हें कहीं से कोई मदद नहीं मिली।

गांव वालों ने प्रशासन से मांगी मदद

ऐसे में उन्होंने अपनी जमीन बेच दी। जमीन के बदले मिले पैसे से उन्होंने एंबुलेंस रिजर्व किया और बेटे का शव घर मंगवाया। गढ़वा से सोलापुर की दूरी करीब 1500 किलोमीटर पड़ती है। इतनी दूर तक जाकर बेटे की लाश लाने के लिए पिता को जमीन बेचनी पड़ी।

मामले में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस गरीब परिवार की मदद की गुहार लगाई है। संगमा के पूर्व मुखिया ने घटना को हृदय विदारक बताते हुए प्रशासन से सहयोग की अपील की है। पूर्व मुखिया ने बताया कि मृतक के दो छोटे बच्चे और पत्नी भी है। प्रशासन को चाहिए कि वे इस गरीब पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद करें।