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Jharkhand: ‘मंईयां’ ने भर दी हेमंत-कल्पना की ‘झोली’, BJP का बेटी-माटी पर कब्जा का नरेटिव विफल

Jharkhand: झारखंड में मंईयां योजना की चर्चा ग्रामीण इलाकों में महिलाओं से खूब सुनने को मिली। इससे उलट भाजपा की बेटी-माटी-रोटी पर कब्जे के एजेंडे की चर्चा कम रही। पढ़िए शादाब अहमद की खास रिपोर्ट...

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Jharkhand: झारखंड जैसे आदिवासी बाहुल्य प्रदेश में 18 से 50 साल आयु की महिलाओं के खातों में हर महीने एक हजार रुपए डालने की मंईयां योजना का दांव विधानसभा चुनाव में गेम चेंजर साबित हुआ। 'मंईयां' की बदौलत लोगों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पत्नी कल्पना सोरेन की झोली 'विधायकों' से भर दी। मुख्यमंत्री हेमंत की पत्नी कल्पना ने मंईयां योजना को घर-घर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

महिलाओं का पुरुषों के मुकाबले करीब 5 लाख 51 हजार से ज्यादा मतदान

झारखंड में मंईयां योजना की चर्चा ग्रामीण इलाकों में महिलाओं से खूब सुनने को मिली। चुनाव के बीच महिलाओं को चौथी किश्त 15 नवंबर के आसपास भेजी गई। इस बीच हेमंत व कल्पना सोरेन का दिसंबर से हर माह ढाई हजार रुपए देने का वादा महिलाओं को भा गया। इससे उलट भाजपा की बेटी-माटी-रोटी पर कब्जे के एजेंडे की चर्चा कम रही। रही सही कसर मतदान के दिन झारखंड की 81 में से 68 सीटों पर महिलाओं का मतदान पुरुषों से अधिक होने से पूरी हो गई। यहां सिर्फ 13 सीटों पर पुरुषों का मतदान महिलाओं के मुकाबले अधिक रहा। अब नतीजों से पता चल रहा है कि भाजपा की बढ़त वाली 21 में से 8 सीटें पुरुषों के अधिक मतदान वाली है। महिलाओं के अधिक मतदान वाली अधिकांश सीटें इंडिया ब्लॉक के खाते में गईं।

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आदिवासी सीएम के अपमान का मुद्दा भी चला

मुख्यमंत्री हेमंत को भ्रष्टाचार के मामले में जेल भेजने का असर भाजपा के लिए नकारात्मक साबित हुआ। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे आदिवासी सीएम का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में आदिवासी सीएम नहीं बनाएगी। इसके चलते आदिवासी मतदाताओं का ध्रुवीकरण हुआ।

भाजपा के पास लीडर का अभाव

झारखंड के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी और जेएमएम से लाए गए चंपाई सोरेन पर भाजपा को भरोसा था। मरांडी खुद अपनी सीट पर धनवर में फंसे रहे। चंपई खुद चुनाव जीत गए, लेकिन उनके बेटे बाबूलाल सोरेन को हार का सामना करना पड़ा है। इससे साफ दिख रहा है कि आदिवासियों ने भाजपा से दूरी बनाए रखी है।

लोगों के समझ नहीं आया रोटी-बेटी और माटी का मुद्दा

भाजपा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे को आगे करते हुए रोटी, बेटी और माटी की रक्षा का नारा दिया, लेकिन भाजपा नेता इस मुद्दे को लोगों के बीच सही तरह से नहीं रख सके। हेमंत सोरेन व कांग्रेस के नेताओं ने इसका जवाब देते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की बताते हुए भाजपा को ही घेर लिया था।

फेक्ट फाइल

कुल मतदाता: 25778149
मतदान करने वाले पुरुष: 8564524
मतदान करने वाली महिलाएं: 9116321