
जोशीमठ भू-धंसाव के रहस्य का खुलासा करेगी केंद्र की 6 सदस्यीय टीम, मौके पर पहुंचे CM धामी ने दिए ये निर्देश
उत्तराखंड के जोशीमठ में लगातार भू धंसाव हो रहा है। इस बीच ज्योर्तिमठ और नृसिंह धाम को भारी नुकसान हुआ। कुल देवता का मंदिर धराशायी हो गया है। जोशीमठ पर खतरा बढ़ रहा है। जोशीमठ रहेगा या खत्म हो जाएगा, जनता में यह सवाल तेजी से चर्चा में है। उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। इस चिंता के तहत सीएम धामी मौके पर पहुंचे और जोशीमठ में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। साथ ही प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। इस अवसर पर सीएम धामी ने प्रशासन को कई निर्देश दिए। इधर जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव से राज्य सरकार के साथ ही साथ केंद्र सरकार भी चिंतित नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने जोशीमठ भू-धंसाव के रहस्य का पता लगाने के लिए 6 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह विशेषज्ञ टीम तीन दिन में अपनी रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगी। इस संबंध में शुक्रवार को ही केंद्र सरकार ने आदेश जारी किए हैं।
पानी के रिसाव से काफी घरों में आई दरारें - सीएम धामी
उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ में प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद प्रभावित क्षेत्रों का जायजा भी लिया। सीएम धामी ने कहाकि, पानी के रिसाव से काफी घरों में दरारें आई हैं, हमारा प्रयास यही है कि सभी को सुरक्षित किया जाए, लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इसके कारणों का पता लगाया जा रहा है। जरूरी चीज़ें भी की जा रही हैं।
जल शक्ति मंत्रालय ने समिति गठित की
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार 6 जनवरी को देहरादून में अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की थी। उत्तराखंड के जोशीमठ में भू धंसाव के अध्ययन के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने समिति गठित की है। ये समिति बारीकी से जोशीमठ का अध्ययन करेगी। जोशीमठ में लगातार दरारें चौड़ी होती जा रही हैं, जिससे लोग दहशत में हैं।
जोशीमठ में भू धंसाव से करीब 600 घर खतरे की जद में
जोशीमठ में भू धंसाव के कारण स्थिति रोज खतरनाक होती जा रही है। घरों और सड़कों में पड़ी दरारें चौड़ी होती जा रही हैं। कल एक मंदिर भी ढह चुका है। साथ ही जमीन के भीतर से लगातार पानी निकल रहा है। यहां 600 से ज्यादा घर खतरे की जद में हैं।
ज्योर्तिमठ, नृसिंह धाम मंदिर को भारी नुकसान : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि, जोशीमठ भू धंसाव से ज्योर्तिमठ और भगवान बदरीनाथ के शीतकालीन प्रवास स्थल को भारी नुकसान पहुंचा है।उन्होंने आरोप लगाया कि, सरकारों की अदूरदर्शिता और अनियोजित विकास कार्यों ने सनातन धर्म के शिखर स्थलों सहित पौराणिक नगरी जोशीमठ (ज्योर्तिमठ) के लाखों नागरिकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।
कभी भी खत्म हो सकता है जोशीमठ!
उत्तराखंड का जोशीमठ (Joshimath) कभी भी खत्म हो सकता है। इस बारे में एक धार्मिक भविष्यवाणी प्रचलित है कि, भविष्य में बदरीनाथ धाम विलुप्त हो जाएगा। और जोशीमठ से 25 किमी दूर भविष्यबदरी में भगवान बदरीविशाल के दर्शन होंगे। धार्मिक भविष्यवाणी तो है ही पर इसके कुछ वैज्ञानिक कारण भी बताए जा रहे हैं। जोशीमठ पर आए इस खतरे को लेकर साल 1976 में तत्कालीन गढ़वाल कमिश्नर एमसी मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक समिति ने एक रिपोर्ट में जोशीमठ पर खतरे का जिक्र किया था।
Updated on:
07 Jan 2023 02:34 pm
Published on:
07 Jan 2023 02:32 pm

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