
पंचमहाल जिले की हालोल तहसील में पावागढ़ पर्वत पर विराजमान मां महाकाली का पौराणिक मंदिर है। यहां काली यंत्र की पूजा की जाती है। 10वीं-11वीं शताब्दी का यह मंदिर को मां काली का निवास स्थान माना जाता है और यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि देवी सती का प्रतीकात्मक अंगूठा यहां गिरा था। मंदिर में तीन दिव्य मूर्तियां हैं। बीच में कालिका माता, दाईं ओर महाकाली और बाईं ओर बहुचरा माता विराजमान हैं। चैत्र नवरात्र और आसोज नवरात्र में करीब 50 लाख भक्त दर्शन के लिए यहां आते हैं। हर साल गुजरात के पावागढ़, वडोदरा, सूरत, सौराष्ट्र के अलावा मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित पड़ोसी और अन्य राज्यों के लाखों भक्त मंदिर में दर्शन करने आतेे हैं।
मंदिर के इतिहास के बारे में यहां मिलता है जिक्र
1961 में गुजरात के मेलों और त्योहारों की प्रकाशित पुस्तक में आर.के. त्रिवेदी के अनुसार देवी कालिका माता की पूजा शुरू में स्थानीय भीलों और कोलियों की ओर से की जाती थी। एक मान्यता के अनुसार पावागढ़ की कालिका माता की पूजा आदिवासियों की ओर से भी की जाती है।
मंदिर का वर्णन 15वीं सदी के नाटक गंगादास प्रताप विलासा नाटक में किया गया है। ऋषि विश्वामित्र ने भी महाकाली माताजी को प्रसन्न करने के लिए पावागढ़ पहाड़ी की तलहटी में कठोर तपस्या की थी। पावागढ़ विश्वामित्री नदी का स्रोत भी है। महाकाली माताजी को ऋषि विश्वामित्र ने बुलाया और पावागढ़ पर्वत शिखर पर स्थापित किया।
पीएम मोदी ने मंदिर के नए शिखर पर किया ध्वजारोहण
गुंबददार मंदिर की चट्टान पर एक मुस्लिम धार्मिक स्थल और सूफी संत सदन शाह पीर का मकबरा भी था, जिसे 2022 में मंदिर के पुनर्विकास के बाद दरगाह के करीब ले जाया गया और मंदिर का एक नया शिखर तैयार किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून 2022 को नए स्वर्ण शिखर पर ध्वजारोहण किया था।
Published on:
23 Oct 2023 09:36 am
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