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एंकर सुधीर चौधरी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान HC की टिप्पणी, ‘हम भारतीय की मानसिकता…’

कर्नाटक हाईकोर्ट में पत्रकार सुधीर चौधरी बनाम कर्नाटक राज्य केस की सुनवाई हुई। इस दौरान HC ने नस्लभेद को लेकर कड़ी टिप्पणी की। जानिए क्या कहा...

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कोर्ट (फाइल फोटो पत्रिका)

कर्नाटक हाईकोर्ट में 2023 में दर्ज किए गए एक हेट स्पीच केस को रद्द करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। कर्नाटक सरकार ने पत्रकार सुधीर चौधरी पर स्वावलंबी सारथी योजना पर झूठी और भड़काऊ रिपोर्ट चलाने का आरोप लगाया है। पत्रकार सुधीर चौधरी बनाम कर्नाटक राज्य केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण ने कहा कि हम सभी भारतीयों की मानसिकता की वजह से देश में समुदाय आधारित राजनीति और तुष्टिकरण का काम हो रहा है।

हम कहते हैं नेता भ्रष्ट है, लेकिन…

जस्टिस अरुण कुमार ने आगे कहा कि इसी रवैये की वजह से राजनीतिक पार्टियां भी इसके अनुसार ही नेताओं का चयन करती हैं। हम हर समुदाय को अलग नजर से देखते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि इसी वजह से राजनीति में टिकट देने के समय भी पार्टियां उम्मीदवार की योग्यता से ज्यादा उसके समुदाय को महत्व देती हैं। हम कहते हैं की नेता भ्रष्ट हैं, लेकिन सच्चाई तो यह है कि लोकतंत्र में जनता को वही नेता मिलता है जिसके वह योग्य होते हैं।

हम भारतीय सबसे बड़े नस्लवादी में से एक

हम भारतीयों की यह नहीं समझते कि यहां केवल एक ही प्रजाति है। जिसे हम होमोसेपियंस कहते हैं। जस्टिस अरुण ने कहा कि हम भारतीय सबसे बड़े नस्लभेदी लोगों में से एक हैं। हम दूसरे समाजों पर नस्लवाद और रंगभेद का आरोप लगाते हैं, लेकिन इस मामले में हम भी किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक दूसरे को अलग-अलग नजर देखने के कारण ही अंग्रेजों ने हमें अपना गुलाम बनाया था। क्योंकि हम में राष्ट्रीयता का बोध नहीं था।

सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी

वहीं, बहस के दौरान जस्टिस अरुण कुमार ने सरकारी वकील से पूछा कि क्या आजतक की रिपोर्ट में सच में ऐसा कोई तथ्यात्मक झूठ था? क्या रिपोर्ट में यह था कि यह योजना केवल एक ही समुदाय को लाभ पहुंचाकर हिंदुओं को वंचित कर रही है। इस पर शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि शो में मुस्लिम समुदाय का दानवीकरण किया गया और उनके खिलाफ घृणा फैलाई गई। इस पर जस्टिस अरुण ने कहा कि राज्य और शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाते कि रिपोर्ट में स्पष्ट झूठ कहा गया था तो चैनल और एंकर को राहत मिल सकती है। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी इस बात का दावा कर रहे हों कि यह भड़काऊ सामग्री है, लेकिन वह इसे साबित करने में सक्षम नहीं है कि कौन सा तथ्य झूठ है। इस मामले की सुनवाई अब 13 जनवरी 2026 को होगी।

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