
करूर भगदड़ (Patrika Graphic)
Karur Stampede: करूर भगदड़ मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने DMK नेता आर.एस. भारती की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि TVK से जुड़े कुछ लोग जिनमें राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों के नाम भी सामने आए हैं गवाहों को प्रभावित करने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
आज (सोमवार) को दो न्यायाधीशों की पीठ जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागु ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने जब DMK की याचिका का उल्लेख किया, तो अदालत ने इसे अगले ही दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। यह कदम मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
यह दर्दनाक घटना 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में हुई थी, जब TVK प्रमुख और अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की एक राजनीतिक रैली के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ बेकाबू होने के बाद भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।वर्तमान में इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता आर.एस. भारती द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग सार्वजनिक मंचों से बयान देकर गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं, जांच की दिशा को जानबूझकर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, CBI जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कुछ राजनीतिक बयान आपराधिक जिम्मेदारी को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिशों की ओर इशारा करते हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह मांग की गई है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक नीचे दिए लोग सार्वजनिक बयान देने से रोके जाएं-
मांग में कहा गया है कि ऐसे बयान न्यायिक प्रक्रिया और गवाहों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मृतकों के परिजनों और घायलों को दिए जाने वाले मुआवजे, अनुकंपा नियुक्तियों और अन्य सरकारी सहायता का वितरण जांच को प्रभावित कर सकता है। हालांकि याचिका में यह भी स्वीकार किया गया है कि राज्य सरकार के पास राहत देने का अधिकार है, लेकिन इसे पूरी पारदर्शिता और नियंत्रित प्रक्रिया के तहत लागू किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट 2 जुलाई 2026 को दिए गए कथित सार्वजनिक बयानों की भी जांच का आदेश दे। यदि इन बयानों को गवाहों को प्रभावित करने या जांच में बाधा डालने वाला पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
इस मामले की जांच पहले राज्य स्तर की SIT के पास थी, लेकिन अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे हटाकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया था। इसके साथ ही अदालत ने जांच की निगरानी के लिए एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति भी गठित की थी, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
Updated on:
06 Jul 2026 12:58 pm
Published on:
06 Jul 2026 12:58 pm
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