
Kashmiri Shawl Sellers
Livelihood: सर्दियों में गर्म और ऊनी कपड़ों के मामले में कश्मीरियों का कोई जवाब नहीं है। इस सीज़न में भारत के कई राज्यों में कश्मीरी व्यापारियों का दिखना एक आम बात है। ये व्यापारी ख़ासतौर पर ऊनी कपड़े, क़ालीन और दुनिया भर में मशहूर पश्मीना शॉल लेकर शहरों और गांवों के गली-मोहल्लों में निकलते हैं (Kashmir Winter Trade)। लेकिन हाल के दिनों में इन कश्मीरी शॉल विक्रेताओं (Kashmiri Shawl Sellers) के लिए हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। देश के कुछ हिस्सों से इन व्यापारियों पर हमले और बदसुलूकी की ख़बरें सामने आई हैं, जिससे उनके सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया है। अब उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे अपनी जान की हिफ़ाज़त करें या अपने परिवार का पेट पालने के लिए अपनी रोज़ी-रोटी (Livelihood) को दांव पर लगाएं।
कश्मीरी व्यापारियों के लिए यह महज़ व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे साल की कमाई का मुख्य ज़रिया होता है। कश्मीर की सख़्त सर्दियों में जब वहां कोई काम नहीं होता, तब ये लोग देश के मैदानी इलाक़ों का रुख़ करते हैं। यहां से कमाए गए पैसों से ही वे अपने परिवारों की परवरिश करते हैं और बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च उठाते हैं। लेकिन डर और ख़ौफ़ के मौजूदा माहौल ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया है। कई व्यापारियों ने ख़ौफ़ के मारे अपना सामान समेट कर वापस कश्मीर लौटना शुरू कर दिया है।
| क्र.सं. | तारीख / महीना | स्थान (राज्य) | पीड़ितों की संख्या | घटना का विवरण |
| 1. | 28 जनवरी 2026 | विकास नगर, देहरादून (उत्तराखंड) | 2 (ताबिश अहमद और मो. दानिश) | दुकान पर सामान लेते समय क्षेत्रीय पहचान को लेकर विवाद हुआ। स्थानीय लोगों और दुकानदार ने लोहे की रॉड से हमला किया, जिसमें 18 वर्षीय ताबिश का हाथ टूट गया और सिर में गंभीर चोट आई। |
| 2. | जनवरी 2026 (अंत में) | कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) | 1 | एक शॉल विक्रेता के साथ स्थानीय लोगों द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। |
| 3. | 28 दिसंबर 2025 | घुमारवीं, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) | 1 (जहांगीर अहमद) | स्थानीय समूहों द्वारा मारपीट की गई और काम करने से रोका गया। 'जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन' के अनुसार, यह साल 2025 में हिमाचल में कश्मीरियों के साथ उत्पीड़न की 17वीं घटना थी। |
| 4. | दिसंबर 2025 | कलायत, कैथल (हरियाणा) | 2 | दो कश्मीरी विक्रेताओं को सड़क पर रोककर बदसलूकी की गई और उन पर 'वंदे मातरम' बोलने का दबाव डाला गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। |
| 5. | 23 अप्रैल 2025 | मसूरी (उत्तराखंड) | 2 | स्थानीय युवकों द्वारा जबरन पहचान पत्र (ID) मांगते हुए मारपीट और गालियां दी गईं। इस हमले के खौफ से 16 से 20 अन्य कश्मीरी विक्रेता लाखों का माल छोड़कर रातों-रात शहर से पलायन कर गए। |
हमलों और धमकियों की वजह से जो व्यापारी अभी भी रुके हुए हैं, वे ख़ौफ़ के साये में अपना व्यापार कर रहे हैं। पहले जहां वे बेख़ौफ़ होकर दूर-दराज़ के इलाक़ों तक जाते थे, वहीं अब वे महज़ चुनिंदा और भीड़-भाड़ वाले महफ़ूज़ इलाक़ों में ही सिमट कर रह गए हैं। इसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ रहा है। जो शॉल विक्रेता दशकों से भारत के कई राज्यों में भाईचारे और अमन के साथ अपना व्यापार करते आ रहे थे, वे आज ख़ुद को ग़ैर-महफ़ूज़ (असुरक्षित) और अकेला महसूस कर रहे हैं।
कश्मीरी व्यापारियों ने इन वाक़यात (घटनाओं) पर गहरा दुख और अफ़सोस ज़ाहिर किया है। उनका कहना है, "हम यहां सियासत करने नहीं, बल्कि सिर्फ़ अपनी रोज़ी-रोटी कमाने आते हैं। हमें शक की नज़र से देखना और निशाना बनाना बेहद तकलीफ़देह है।" वहीं, मुक़ामी (स्थानीय) नागरिक समाज और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन हमलों की सख़्त आलोचना की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन ग़रीब व्यापारियों को हिफ़ाज़त मुहैया कराई जाए और हमलावरों के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई हो।
लगातार बढ़ रहे विवाद और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद, कई राज्यों की मुक़ामी पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन ने कश्मीरी व्यापारियों को हिफ़ाज़त का भरोसा दिलाया है और जिन कॉलोनियों में वे किराए पर रहते हैं, वहां गश्त बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, ताकि किसी भी नाख़ुशगवार हालात में व्यापारी फ़ौरन मदद मांग सकें। कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।
इस मसले का एक बड़ा आर्थिक और तहज़ीबी (सांस्कृतिक) पहलू भी है। कश्मीरी शॉल और क़ालीन उद्योग मुख्य रूप से हथकरघा (Handloom) पर निर्भर है। अगर ये व्यापारी मैदानी इलाक़ों में अपना माल नहीं बेच पाएंगे, तो कश्मीर की वादियों में बैठे उन हज़ारों बुनकरों और कारीगरों के घरों में भी चूल्हा नहीं जलेगा, जो दिन-रात एक करके इन बेहतरीन चीज़ों को बनाते हैं। इसके अलावा, यह हालात कश्मीर और बाक़ी भारत के बीच दशकों पुराने तहज़ीबी और व्यापारिक ताल्लुक़ात को भी गहरी ठेस पहुंचाते हैं।
Updated on:
22 Feb 2026 04:52 pm
Published on:
22 Feb 2026 04:47 pm
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