
वकील दीपिका पुष्कर नाथ (X)
जम्मू की मशहूर वकील दीपिका पुष्कर नाथ, जिन्होंने 2018 के कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में आठ साल की बच्ची के परिवार का प्रतिनिधित्व किया था, ने आरोप लगाया है कि लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद उनकी सुरक्षा घटा दी गई है। सुरक्षा में कटौती के कारण उन्हें अपनी बेटी को स्कूल भेजने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टीएनआईई से बातचीत में दीपिका ने बताया कि लगभग तीन महीने पहले उनके सुरक्षा में तैनात दो पीएसओ में से एक को पुलिस ने हटा दिया। उन्होंने कहा, यह सुरक्षा मुझे उस हाई-प्रोफाइल केस को संभालने के बाद दी गई थी, ताकि मुझे खुले तौर पर मिलने वाली धमकियों से बचाया जा सके।
दीपिका ने आगे कहा कि नवंबर 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के आईजीपी (सिक्योरिटी) से संपर्क किया और पीएसओ के प्रतिस्थापन की मांग की, लेकिन इसके बजाय सुरक्षा में तैनात एक पीएसओ को पूरी तरह हटा दिया गया। अब उनके पास केवल एक ही पीएसओ है। उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक शिकायत करने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने की बात कही।
उन्होंने सवाल उठाया, मैंने पीड़िता के परिवार का प्रतिनिधित्व करने के बाद लगातार धमकियों और हमलों का सामना किया है। जब किसी जैसे फारूक अब्दुल्ला को भी Z+ सुरक्षा के बावजूद हत्या के प्रयास से बचना पड़ता है, तो मेरे लिए इसका क्या मतलब है?
दीपिका ने बताया कि पहले एक पीएसओ उनकी बेटी, जो आठवीं कक्षा की छात्रा है, को स्कूल तक छोड़ता था, जबकि दूसरा पीएसओ हमेशा उनके साथ रहता था। लेकिन सुरक्षा घटाने के बाद उन्हें डर के कारण अपनी बेटी को अकेले या अजनबियों के साथ स्कूल भेजने में परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा वह केवल परीक्षा देने ही गई। मुझे डर है कि अगर कुछ हुआ, तो किसका जिम्मा होगा।
कुछ समय के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ने वाली और फिर वापसी करने वाली दीपिका ने कहा कि रसाना मामले के बाद उन्हें सामाजिक और पेशेवर तौर पर अलगाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मुझसे या मेरे परिवार से कुछ होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जम्मू सुरक्षा के आईजीपी पर होगी। धमकी का मूल्यांकन करने के लिए कोई ठोस एसओपी नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी पत्र लिखा है।
अपने पत्र में दीपिका ने लिखा कि 2018 से उन्हें संगठित नफरत अभियान, सार्वजनिक निंदा और विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने यौन हिंसा की पीड़िता के पक्ष में खड़े होने का साहस किया। उन्होंने अदालत से अपील की है कि उनकी सुरक्षा को मनमाने तरीके से वापस लेने के मामले को संज्ञान में लिया जाए और उन्हें तुरंत सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया जाए। दीपिका ने आखिर में कहा अगर मेरी पूरी सुरक्षा बहाल नहीं की गई, तो मैं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगी।
Published on:
20 Mar 2026 12:57 pm
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