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10 हजार सिविल डिफेंस कर्मियों को बेेरोजगार करेगी दिल्ली सरकार! CM केजरीवाल ने दिया आदेश

Kejriwal government gave order: सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार 40 विभागों में तैनात 10,000 से अधिक सिविल डिफेंस कर्मियों की सेवाएं इस महीने के अंत तक समाप्त कर सकती है।  

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दिवाली से पहले दिल्ली के सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के लिए बुरी खबर है। बताया जा रहा है कि इस साल अप्रैल से रोके गए वेतन को तत्काल जारी करने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली सरकार 40 विभागों में तैनात 10,000 से अधिक सिविल डिफेंस कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर सकती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि शुरुआत में प्रस्ताव राजस्व विभाग के विभिन्न रूटीन काम में लगे 189 सिविस डिफेंस वॉलंटियर्स को हटाने का था. हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सभी वॉलंटियर्स के रोजगार पर सही कानूनी स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए और अक्टूबर के अंत तक उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए।

CM केजरीवाल ने दिया तुरंत वेतन देने का आदेश

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि इन सभी कर्मियों को अक्टूबर तक का वेतन तुरंत दिया जाए। इस मामले पर दिल्ली सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि 10,792 सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स में से 8,574 को परिवहन विभाग ने डीटीसी और क्लस्टर बसों में बस मार्शल के रूप नियुक्त किया है। वहीं राजस्व, एमसीडी, पर्यावरण, खाद्य एवं आपूर्ति, व्यापार एवं कर और चुनाव अन्य विभाग हैं, जो इन वॉलंटियर्स की सेवाओं का उपयोग करते हैं।

अब एडहॉक पर नहीं होगी भर्ती

सूत्रों ने आगे बताया कि CM केजरीवाल ने यह भी सिफारिश की है कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भविष्य की सभी भर्ती उचित प्रक्रिया के अनुसार ही होगी। सीएम केजरीवाल की सिफिारिश में यह भी कहा गया कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की भर्ती आगे से एडहॉक की प्रक्रिया से नहीं की जाएगी। सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 के अनुसार सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की मूल भूमिका स्थानीय प्रशासन की सहायता करना है, लेकिन वे अलग-अलग कार्यों में लगे हुए हैं, जिनमें ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ जैसे अभियानों में प्रशासन की सहायता करना और उप रजिस्ट्रार कार्यालयों में विभिन्न कार्यों में सहायता करना शामिल है।

वेतन पर सालाना 400 करोड़ रुपये होते है खर्च

एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में इन सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को सालाना 400 करोड़ रुपये वेतन के रूप में दिए जाते हैं, जिसमें से 280 करोड़ रुपये केवल बस मार्शलों को दिए जाते हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में उनके द्वारा किया जा रहा काम सिविल डिफेंस एक्ट के अनुरूप नहीं है।

बता दें कि इस साल अप्रैल से अपना वेतन रोके जाने के कारण सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स ने हाल ही में राजनिवास, मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के आवास और दिल्ली सचिवालय के पास विरोध प्रदर्शन किया था। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इन वॉलंटियर्स की उनकी अनिवार्य जिम्मेदारियों और कार्यों के विरुद्ध तैनाती को विभिन्न विभागों द्वारा अवैध माना गया था और उनके वेतन को रोक दिया गया था।

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