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Delhi Water Crisis: चार राज्यों का पानी पीने के बाद भी देश की राजधानी दिल्ली क्यों रह जाती है प्यासी?

Delhi Water Crisis: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लोग एक साथ दो बड़े समस्याओं का सामना कर रहे हैं। एक ओर, वे अत्यधिक गर्मी की चपेट में हैं और दूसरी ओर, पानी की भारी कमी की समस्या से भी जूझ रहे हैं।

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Delhi Water Crisis: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली अत्यधिक गर्मी से तप रही है, और अधिकतम तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले कुछ दिनों में कई क्षेत्रों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया है। मौसम की इस परेशानी के साथ ही जल संकट ने दिल्लीवासियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दिल्ली के कई इलाकों में पानी की गंभीर किल्लत है, जिससे लोग पानी के टैंकर को देखकर उस पर झपट पड़ते हैं और सैकड़ों लोगों के बीच अफरा-तफरी मच जाती है। बावजूद इसके, पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

नेताओं और नीति निर्धारकों के बड़े-बड़े वादों और तमाम दावों के बावजूद हर साल यह संकट दिल्ली के लोगों के सामने आकर खड़ा हो जाता है। केजरीवाल सरकार ने कुछ रोज पहले पानी की बर्बादी करने वालों पर जुर्माना लगाने की घोषणा की है। जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर थे तब उन्होंने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मदद की अपील की थी। ऐसे में कई सवाल उठते हैं, जैसे देश की राजधानी दिल्ली के इस जल संकट का मुख्य कारण क्या है, यहां की जनता को कितना पानी चाहिए और सरकार क्या कदम उठा रही है? आइए मौजूदा जल संकट को डिटेल में समझते हैं…

जलसंकट क्यों है?

दिल्ली में जल संकट के दो मुख्य कारण हैं: अत्यधिक गर्मी और पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता। प्रचंड गर्मी के कारण पानी की मांग में वृद्धि हुई है। दिल्ली की आबादी के अनुपात में पानी की आपूर्ति पहले से ही कम है। इसके अलावा, दिल्ली का अपना कोई जल स्रोत नहीं है, इसलिए इसे पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। गर्मी के कारण अन्य राज्य भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं, जिससे दिल्ली की समस्या और बढ़ जाती है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के अनुसार, इस साल दिल्ली को प्रतिदिन 32.1 करोड़ गैलन पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

कहां से आता है पानी?

दिल्ली को उत्तर प्रदेश सरकार गंगा नदी से, हरियाणा सरकार यमुना नदी से और पंजाब सरकार भाखरा नांगल से पानी की सप्लाई करती है। दिल्ली सरकार द्वारा 2023 में की गई आर्थिक सर्वे के मुताबिक यहां हर दिन भाखरा-नांगल से रावि-व्यास नदी से 22.1 करोड़ गैलन, गंगा नदी से 25.3 करोड़ गैलन और यमुना से 38.9 करोड़ गैलन पानी दिल्ली को मिलता था। तीनों नदी के अलावा कुंए, ट्यूबवेल और ग्राउंड वाटर से 9 करोड़ गैलन पानी आता था यानी कुल मिलाकर दिल्ली को हर दिन 95.3 करोड़ गैलन पानी मिलता था। जबकि 2024 के लिए यह कुल आंकड़ा 96.9 करोड़ गैलन है।

दिल्ली को रोज कितने करोड़ गैलन पानी की जरूरत है?

जिस प्रकार से दिल्ली के कई इलाकों में जल संकट है, लोग परेशान है, उसके बाद सबसे अहम सवाल कि यहां कितने पानी की जरूरत है। डीजेबी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि यहां दैनिक जल आपूर्ति 129 करोड़ गैलन प्रति दिन की आवश्यकता के मुकाबले 96.9 करोड़ गैलन प्रति दिन रह गई है। इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि दिल्ली को हर दिन 129 करोड़ गैलन की जरूरत है कि लेकिन उसे सिर्फ 96.9 करोड़ गैलन पानी प्रति दिन ही मिल रहा है।

जल संकट का मुख्य कारण

दिल्ली में हर साल होने जल संकट का मुख्य कारण इसका लैंडलॉक स्टेट होना है। लैंडलॉक का मतलब, हर ओर से जमीन से घिरा हुआ होता है। राजधानी दिल्ली का अपना कोई पानी का बड़ा स्रोत नहीं है। यहां के लोगों को पानी के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा पर निर्भर होना पड़ता है। इसमें भी सबसे बड़ा भाग हरियाणा का है।