
Know What Is Popular Front Of India NIA Raid and Controversies
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA देशभर में छापेमारी कर रही है। ये छापेमारी PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े लोग और ठिकानों पर हो रही है। NIA ने इस मामले में 106 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की है। खास बात यह है कि अकेले केरल से ही अब तक सबसे ज्यादा 22 लोगों को अरेस्ट किया गया है। जबकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक से 20-20 लोगों को गिरफ्तार किया है। एनआईए की इस ताबड़तोड़ छापेमारी के बीच ये जानते हैं कि आखिर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है क्या? इससे जुड़े विवाद कौन-कौन से हैं।
क्या है पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (What Is PFI)?
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी PFI की शुरुआत 22 नवंबर 2006 से हुई थी। इस संगठन को तीन मुस्लिम संगठनों के मिलने के बाद शुरू किया गया था। जिन तीन मुस्लिम संगठनों के मिलने से पीएफआई बना उसमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिता नीति पसरई प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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खुद को क्या मानता है PFI
PFI खुद को गैर-लाभकारी संगठन बताता है। पीएफआई में कितने सदस्य हैं, इसकी जानकारी संगठन मुहैया नहीं करता है। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि, देश के 20 राज्यों में पीएफआई की यूनिट है।
किस शहर में है PFI का मुख्यालय?
PFI का हेडक्वार्टर शुरुआत में तो केरल के कोझिकोड में था। लेकिन समय के साथ इसका स्थान परिवर्तन कर दिया गया। मौजूदा समय में पीएफआई का मुख्यालय देश की राजधानी दिल्ली में है।
कौन चलाता है PFI?
पीएफआई की कमान फिलहाल ओएमए सलाम के हाथों में है। ओएमए सलाम इसका संस्था का अध्यक्ष हैं। इसके अलावा ईएम अब्दुल रहीमान उपाध्यक्ष।
PFI की अपनी यूनिफॉर्म भी है। हर वर्ष 15 अगस्त को PFI फ्रीडम परेड का आयोजन करता है। 2013 में केरल सरकार ने इस परेड पर रोक लगा दी। इसकी वजह थी, PFI की यूनिफॉर्म पुलिस की वर्दी की तरह ही सितारे और एम्बलम लगे हैं।
PFI और विवाद
पॉपुलस फ्रंड ऑफ इंडिया यानी PFI का विवादों से गहरा नाता रहा है। डेढ दशक के अंदर ही इस संगठन ने अपना नाम कई विवादों से जोड़ लिया है।
- PFI के कार्यकर्ताओं पर आतंकी संगठनों से कनेक्शन से लेकर हत्याएं तक के आरोप लगते हैं।
- 2012 में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि हत्या के 27 मामलों से PFI का सीधा-सीधा कनेक्शन है
- इनमें से ज्यादातर मामले RSS और CPM के कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़े थे।
- जुलाई 2012 में कन्नूर में एक स्टूडेंट सचिन गोपाल और चेंगन्नूर में ABVP के नेता पर हमला का आरोप PFI पर लगा।
- 2010 में PFI के SIMI से कनेक्शन के आरोप भी लगे।
- 2012 में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि PFI और कुछ नहीं, बल्कि प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का ही नया रूप है।
- PFI के कार्यकर्ताओं के अलकायदा और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों से लिंक होने के आरोप भी लगते रहे हैं।
- हालांकि, PFI खुद को दलितों और मुसलमानों के हक में लड़ने वाला संगठन बताता है।
- अप्रैल 2013 में केरल पुलिस ने कुन्नूर के नराथ में छापा मारा और PFI से जुड़े 21 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। रेड में दो देसी बम, एक तलवार, बम बनाने का कच्चा सामान और कुछ पर्चे बरामद किए गए।
- जनवरी 2020 में भी जब देशभर में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई, तब तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसमें PFI की भूमिका होने का दावा किया था
- मार्च 2021 में यूपी एसटीएफ ने शाहीन बाग में स्थित PFI के दफ्तर की तलाशी ली थी. इससे पहले एक बार और भी PFI ऑफिस की तलाशी ली जा चुकी है
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Published on:
22 Sept 2022 01:08 pm
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