
Krishna Janmashtami
Krishna Janmashtami 2021 : श्रीकृष्ण विष्णु भगवान के अवतार और 16 कलाओं के स्वामी माने जाते हैं। द्वापरयुग में लड्डू गोपाल (Laddu Gopal) से लेकर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) बनने तक उन्होंने कई लीलाएं कीं। श्रीकृष्ण को कई नामों से बुलाया जाता है। मथुरा-वृंदावन (Mathura-Vrindavan) में उन्हें एक नटखट और मोहक बच्चे की तरह प्रेम किया जाता है और कान्हा या कन्हैया (Kanhaiya) कहते हैं। वहीं, द्वारका में द्वारकाधीश श्रीकृष्ण के नाम से पूजे जाते हैं। कन्हैया की हर लीला के पीछे कोई न कोई संदेश छिपा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जानते हैं, श्रीकृष्ण से जुड़ी रोचक बातें-
कृष्ण, वसुदेव और देवकी की आठवीं संतान थे। देवकी कंस की बहन थी। कंस एक अत्याचारी राजा था। एक बार उसने आकाशवाणी सुनी कि देवकी के आठवें पुत्र द्वारा वह मारा जाएगा। इससे बचने के लिए कंस ने देवकी और वसुदेव को मथुरा के कारागार में डाल दिया। मथुरा के कारागार में ही भादो मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उनका जन्म हुआ। कंस के डर से वसुदेव ने नवजात बालक को रात में ही यमुना पार गोकुल में यशोदा के यहां पहुंचा दिया। गोकुल में यशोदा और नंद के घर उनका लालन-पालन हुआ। बाल्यावस्था से ही उन्होंने अपनी लीलाएं दिखाना शुरू कर दिया, उन्होंने ऐसे कार्य किए, जो किसी मनुष्य के लिए सम्भव नहीं थे। जन्म के कुछ समय बाद ही कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना का वध किया। उसके बाद शकटासुर, तृणावर्त सहित कई राक्षसों का वध किया। बाद में गोकुल छोड़कर नंद गांव आ गए। वहां पर भी उन्होंने गोचारण लीला, गोवर्धन लीला, रास लीला आदि से अलौकिक दर्शन करवाए। इसके बाद मथुरा में मामा कंस का वध किया। सौराष्ट्र में द्वारका नगरी की स्थापना की और वहां अपना राज्य बसाया। पांडवों की मदद की और विभिन्न संकटों से उनकी रक्षा की। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और रणक्षेत्र में ही उन्हें उपदेश दिया। लगभग 12५ वर्षों के जीवनकाल के बाद उन्होंने अपनी लीला समाप्त की।
श्रीकृष्ण से जुड़ी रोचक बातें -
भगवान कृष्ण के 108 नाम हैं, जिनमें गोविंद, गोपाल, घनश्याम, गिरधारी, मोहन, बांके बिहारी, बनवारी, चक्रधर, देवकीनंदन, हरि और कन्हैया प्रमुख हैं।
देवकी की सातवीं संतान बलराम और आठवीं संतान श्रीकृष्ण थे। भगवान ने बाकी छह को भी देवकी से मिलवाया था।
श्रीकृष्ण की 16108 पत्नियां थीं, जिनमें से आठ उनकी पटरानियां थीं। उनके नाम रुक्मिणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा था। बाकी वे रानियां थीं, जिनका भौमासुर ने अपहरण कर लिया था। जब श्रीकृष्ण ने भौमासुर से उनकी जान बचाई तो वे कहने लगीं, अब हमें कोई स्वीकार नहीं करेगा, तो हम कहां जाएं। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी पत्नी का दर्जा देकर उनका जिम्मा उठाया।
अपने गुरु संदीपन को गुरु दक्षिणा देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उनके मृत बेटे को जीवित कर दिया था।
श्रीकृष्ण से भगवत गीता सबसे पहले अर्जुन ने ही नहीं, बल्कि हनुमानजी और संजय ने भी सुनी थी। क्योंकि हनुमानजी कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ पर सवार थे।
श्रीकृष्ण के अवतार का अंत एक बहेलिया के तीर से हुआ माना जाता है, जब वे एक पेड़ के नीचे बैठे थे, तो बहेलिए ने उनके पैर को चिडिय़ा समझ कर तीर चलाया तो तीर श्रीकृष्ण के पैर में लगा, जिसके बाद उन्होंने मानवरूपी देह का त्याग कर दिया था।
Published on:
30 Aug 2021 12:52 pm
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