script आपदा को अवसर में बदलने की बेमिसाल कहानी, देश में कच्छ के विकास मॉडल की बनती है मिसाल, पढ़िए विशेष रिपोर्ट | Kutch to Kamrup Kutch's development model sets an example across the country the story of converting disaster into opportunity | Patrika News

आपदा को अवसर में बदलने की बेमिसाल कहानी, देश में कच्छ के विकास मॉडल की बनती है मिसाल, पढ़िए विशेष रिपोर्ट

locationनई दिल्लीPublished: Feb 13, 2024 02:37:28 pm

Submitted by:

Paritosh Shahi

भाजपा इस बार भी गुजरात ही नहीं बल्कि देश के सामने अब कच्छ के विकास के मॉडल का डंका बजाने की तैयारी है। पढ़िए रुपेश मिश्रा का विशेष लेख...

kutch_5_pm_modi.jpg
,,

आपदा को अवसर में बदलने की कहानी से कहीं साक्षात करना हो तो देश के सबसे बड़े जिले कच्छ का अवलोकन करना काफी है। कच्छ जिले के भुज में स्मृति वन भूकम्प संग्रहालय के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत के विकसित देश बनने की भविष्यवाणी की तो संकेत कच्छ मॉडल की तरफ भी था। ऐसा क्या हुआ कच्छ में कि 'कच्छ मॉडल' पेश कर सरकारें देश भर में विकास की सुनहरी तस्वीरें दिखाती हैं। यह समझने के लिए कच्छ जिले की सीमा में प्रवेश करते समय बस में कंडक्टर से पूछा कि कच्छ में भ्रमण के लिए कितने दिन चाहिए? तपाक से जवाब मिला- पांच दिन भी कम पड़ जाएंगे। यह सुनकर दो दिन में कच्छ की तासीर समझने की मेरा इरादा पल भर में काफूर हो गया। खैर, चुनाव पूर्व परिदृश्य को समझने के लिए मेरी यात्रा की शुरुआत ईस्ट कच्छ यानी गांधीधाम से हुई, जिसे कच्छ की आर्थिक राजधानी कहा जाता है।

kutch_1.jpg


नमक से भरे ट्रक व ऑयल प्लांट

सुबह के नौ बज रहे होंगे। गली- चौबारों की रौनक धीरे- धीरे बढ़ रही थी। दुकानों की शटरें अब खुलने लगी थीं। तभी मुलाकात नितीन गंगवानी से हुई। उसका कहना था कि देश की नामी-गिरामी कंपनियों का यहां कार्यक्षेत्र है। जिले के मुख्यालय भुज की तरफ बढ़ ही रहा था कि कांडला बंदरगाह के 13 किलोमीटर होने का संकेतक नजर आया। जाना तो भुज था, लेकिन कांडला पोर्ट देखने के लिए दिशा बदल ली।

बीच में नमक से भरे ट्रकों व कंपनियों के प्लांट देखकर लग रहा था कि शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ ही मिनटों में कांडला पोर्ट ब्लेयर पहुंच गया जहां समंदर की लहरों के बीच जहाज और भारी-भरकम मशीनें इस इलाके के विकासशील होने का प्रमाण दे रही थीं। यहां लकड़ी, नमक, स्टील, तेल परिवहन का कारोबार है।


कई प्राकृतिक आपदाएं देखी

भुज में एक शख्स से जिज्ञासावश पूछ लिया कि क्या अभी भी भूकंप का डर रहता है। जवाब में निश्चिंतता नजर आई। जवाब मिला- ऐसे छोटे मोटे भूकंप कब आकर चले जाते हैं हमें पता ही नहीं चलता है। पहले तो घर से बाहर निकल जाया करते थे। लेकिन, अब तो वह डर भी खत्म हो गया है। कच्छ के लोगों ने कई प्राकृतिक आपदाएं देखी हैं। पिछले साल जून में भी चक्रवाती तूफान बिपरजॉय से पोर्ट के इस हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा था। अब तो मुश्किल हालातों को देखना और इससे उठ खड़े होने का जज्बा कच्छ के लोगों में अंदर तक घर कर गया है।

kutch_2.jpg


हर घर- हर हाथ रोजगार

कई किलोमीटर तक बिछी नमक की सफेद चादर के बीते कल पर जिले के बन्नी क्षेत्र के धोरणो गांव के सरपंच मियां हुसैन ने वर्ष 2008 का एक वीडियो दिखाया। वे बोले, जहां आज आप देशी- विदेशी सैलानियों के बीच खड़े हैं वहां कभी ऐसे ही बैलगाड़ी और जीप से आना पड़ता था। गांव में बेरोजगारी का आलम ये था कि लोग पलायन करते थे। आज खूबसूरत लगने वाली इस सफेद चादर में हमें हमारी बर्बादी नजर आती थी। कभी नहीं सोचा था कि हमारा गांव कभी इस मुकाम पर पहुंचेगा। आज हमारे गांव में हर घर और हर हाथ को रोजगार है।

बर्बाद हो चुके शहर की बुलंद तस्वीर

भुज शहर बर्बाद हो चुके शहर की बुलंद तस्वीर है। भुज में प्रवेश किया तो आंखों के सामने दो तस्वीरें सामने आ गई। पहली तस्वीर 26 जनवरी 2001 में आए भूकंप के तबाही की, तो दूसरी तस्वीर आज के आसमान छूती इमारतों की। यकीन ही नहीं हो रहा था कि क्या सचमुच 23 बरस पहले बर्बाद हो चुके किसी शहर की इतनी बुलंद तस्वीर बन सकती है? दिमाग इसी उधेड़बुन में लगा ही था कि एक चाय की दुकान पर भीड़ देखकर ठहर गया। चाय वाले के यहां जैसे ही चाय का प्याला हाथ में आया पहला घूंट पीकर ही लगा राजकोट से लेकर कच्छ जिले तक यह सबसे बेहतरीन चाय थी। चाय की तारीफ की तो चाय वाला गुजराती में बोला हम पैकेट वाले दूध की चाय थोड़े बनाते हैं।

kutch_3.jpgphoto_2024-02-13_14-21-40.jpg


विकास के पीछे लोगों की मेहनत

आगे के सफर में मुलाकात होती है अशोक कुमार से। वर्ष 2001 में आए भूकंप के मंजर को याद करते हुए कहते हैं। सब कुछ चौपट हो चुका था। आज जो कच्छ आप देख रहे हैं उसकी कल्पना उस वक्त इस शहर के लोगों सपने में भी नहीं थी। कच्छ की इस विकासगाथा के पीछे सरकार के साथ-सााथ जिले के लोगों की मेहनत को भी नहीं भुलाया जा सकता है। विदेशों में बसे कच्छ के लोगों ने अपने कच्छ को संवारने के लिए दिल खोल कर धन दिया।

भाजपा के आधार को मजबूत करता विकास

इस इलाके का विकास भाजपा के आधार को मजबूत करने का काम करता है। भाजपा इस बार भी गुजरात ही नहीं बल्कि देश के सामने अब कच्छ के विकास के मॉडल का डंका बजाने की तैयारी है। इसी विकासवाद की राजनीति के बीच इस इलाके में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा होगा? जनता के बीच वह किन मुद्दोंं को लेकर जाने वाली है? और सबसे बड़ी बात यह कि उसके कौनसे चेहरे चुनाव मैदान में होंगे? यह सब लोकसभा चुनाव के चंद माह शेष रहनेतक भी स्पष्ट नहीं। कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात करने पर वे खुद स्वीकार करते हैं कि ज्यादातर सीटों पर ऐसे चेहरों का भी अभाव है, जो पूरे क्षेत्र में दमदारी से अपनी पार्टी का पक्ष रख सकें।

ट्रेंडिंग वीडियो