17 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बड़ा सवाल: वकील या गैर-वकील…ट्रिब्यूनलों में कौन रखेगा दलील? दिल्ली हाईकोर्ट करेगा फैसला

Delhi High Court: अदालत ने कहा कि प्रश्न यह है कि जो व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं हैं, क्या वे ट्रिब्यूनल में मामलों की पैरवी कर सकते हैं, भले ही उनके पास एलएलबी डिग्री हो या नहीं।

less than 1 minute read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

Feb 24, 2026

Delhi High Court hearing

दिल्ली हाई कोर्ट (सोर्स: विकिपीडिया)

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट अब इस अहम सवाल पर विचार करेगा कि क्या चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, कॉस्ट अकाउंटेंट और अन्य गैर-अधिवक्ता पेशेवर ट्रिब्यूनलों में अपने मुवक्किलों की ओर से पेश होकर बहस कर सकते हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ टैक्स लॉयर्स समेत लंबित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताया।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि प्रश्न यह है कि जो व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में नामांकित नहीं हैं, क्या वे ट्रिब्यूनल में मामलों की पैरवी कर सकते हैं, भले ही उनके पास एलएलबी डिग्री हो या नहीं। एसोसिएशन ऑफ टैक्स लॉयर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सक्सेना ने दलील दी कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत केवल राज्य बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता ही अदालतों और ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस कर सकते हैं।

एडवोकेट्स एक्ट बनाम कंपनीज एक्ट

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर गैर-वकील पेश हो रहे हैं, जो कानून का उल्लंघन है और एडवोकेट्स एक्ट की धारा 45 के तहत दंडनीय है। दूसरी ओर, सीए और कंपनी सेक्रेटरी पक्ष ने कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 432 व संबंधित नियमों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल में प्रतिनिधित्व का अधिकार बताया। अदालत ने स्पष्ट किया, यह पहले ही तय हो चुका है कि गैर-अधिवक्ता अदालतों में पेश नहीं हो सकते, विचाराधीन प्रश्न ट्रिब्यूनलों में उनके पेश होकर पैरवी करने की वैधता का है। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।