
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फाइल फोटो- पत्रिका)
केरलम में एक थाने की चार दीवारी के अंदर एक 28 साल के नौजवान की जान चली गई। आरोप था कि पुलिस वालों ने उसे इतना पीटा कि वो बच नहीं सका।
निचली अदालत ने इस मामले में सजा भी सुनाई। दो पुलिसवालों को तो फांसी तक की सजा हुई। लेकिन हाई कोर्ट ने सबको बरी कर दिया। अब इस मामले की फाइल सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई की उस अपील पर नोटिस जारी किया, जिसमें केरल हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें सभी आरोपी पुलिस अफसरों को बरी कर दिया गया था।
27 सितंबर 2005 की बात है। तिरुवनंतपुरम के श्रीकंटेश्वरम पार्क से उदयकुमार नाम के एक कबाड़ मजदूर को पुलिस उठा ले गई। उसे फोर्ट पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां रात में ही उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला था। उदयकुमार की जांघों पर इतनी गहरी चोटें थीं कि वही उसकी मौत की वजह बनीं। साफ था कि उसे बेरहमी से पीटा गया था।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी लगा कि मौत के बाद बड़े अफसरों ने मिलकर सबूत मिटाए, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की।
जब मामला ट्रायल कोर्ट में चला तो फैसला सख्त आया। दो पुलिसकर्मियों को हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई। साथ ही कई वरिष्ठ अफसरों को साजिश रचने और सबूत नष्ट करने का दोषी माना गया। परिवार को लगा कि इंसाफ मिल गया। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी।
केरल हाई कोर्ट ने अगस्त 2025 में अपना फैसला सुनाया और सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास हैं, सरकारी गवाह भरोसेमंद नहीं हैं और सीबीआई की जांच में गंभीर खामियां रहीं।
कई अहम गवाह मुकर गए थे, जिससे पूरे केस की नींव कमजोर हो गई। सीबीआई के लिए यह बड़ा झटका था। उसने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सीबीआई की स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 19 मई 2026 को तय की है।
अब देश की सबसे बड़ी अदालत यह तय करेगी कि हाई कोर्ट का फैसला सही था या गलत। उदयकुमार के परिवार की नजरें एक बार फिर न्याय की उम्मीद लेकर इस तारीख पर टिकी हैं।
Published on:
17 Apr 2026 06:49 pm
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