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‘कॉरपोरेट का कर्ज माफ हो गया लेकिन हमारे किसान…’, प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर साधा निशाना

प्रियंका गांधी ने अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधाते हुए सवाल किया कि सालाना दो करोड़ नौकरियां कहां हैं और 30 लाख सरकारी पद खाली क्यों हैं?

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priyanka_gandhi in cg

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर जमकर हमला बोल रही है। कांग्रेस, सपा, राजद समेत सभी दल मौजूदा सरकार पर बेरोजगारी, पेपर लीक, किसानों की आय जैसे मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने एक्स पर केंद्र सरकार से पूछा, "क्या नरेंद्र मोदी के पास रोज़गार के लिए कोई योजना थी भी? आज ही सरकार का जवाब आया- नहीं। इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 न सिर्फ रोज़गार पर मोदी सरकार की भीषण नाकामी का दस्तावेज है बल्कि कांग्रेस की रोज़गार नीति पर मुहर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कुल बेरोज़गारों में 83% युवा हैं, या तो उनके पास नौकरी है ही नहीं या वह बहुत ही कम मेहनताने पर बुरी दशा में काम करने को मजबूर हैं।"

राहुल ने आगे कहा, "रिपोर्ट कहती है 65% पढ़े लिखे युवा बेरोज़गार हैं - हमारी गारंटी है हम 30 लाख सरकारी पदों को भरेंगे। रिपोर्ट कहती है स्किल गैप है - हम पहली नौकरी पक्की से फ्रेशर्स को स्किल्ड वर्क फोर्स बनाएंगे। रिपोर्ट कहती है नए रोज़गारों का सृजन करना होगा - हमारी युवा रोशनी की गारंटी स्टार्ट-अप्स के लिए 5000 रुपया करोड़ की मदद लेकर आ रही है। रिपोर्ट कहती है श्रमिकों के पास सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित रोज़गार नहीं है - हम श्रमिक न्याय के तहत उनका जीवन बदलने जा रहे हैं। कांग्रेस की नीतियां ही 'रोजगार की गारंटी' हैं यह सरकार की रिपोर्ट से भी साबित हो गया है। भाजपा का मतलब - बेरोजगारी और बेबसी, कांग्रेस का मतलब - रोजगार क्रांति। फर्क साफ है!"

प्रियंका गांधी ने दागे सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका ने कहा, "मेरे विकास का हिसाब दो, देश के कुल बेरोजगारों में 83% युवा क्यों हैं? सालाना 2 करोड़ नौकरियां कहां हैं? देश में 30 लाख सरकारी पद खाली क्यों हैं? हर परीक्षा का पेपर लीक क्यों होता है? कॉरपोरेट का 16 लाख करोड़ माफ हो गया लेकिन हमारे किसान कर्ज से आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? किसानों की आय दोगुनी कब होगी? किसानों को MSP कब मिलेगी? देश के पदों और संसाधानों में हमारे दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और गरीब सवर्णों की उचित भागीदारी क्यों नहीं है? महंगाई आज चरम पर क्यों है? घर चलाना मुश्किल क्यों है? आम लोग अपना परिवार क्यों नहीं चला पा रहे हैं? महिलाओं के साथ अत्याचार क्यों बढ़ रहे हैं? महिलाओं पर अत्याचार करने वाले अपराधियों को संरक्षण देना कब बंद होगा?"