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परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का रास्ता खुला, विपक्ष के कड़े विरोध के बीच लोकसभा में ‘शांति’ विधेयक पारित

लोकसभा ने शांति विधेयक2025 को विपक्ष के कड़े विरोधके बीच पारित कर दिया। यह बिल निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी की अनुमति देता है।

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Lok Sabha

लोक सभा (Photo Credit - IANS)

SHANTI Nuclear Energy Bill 2025 Passed in Lok Sabha: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी का रास्ता खोलने वाले स्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) विधेयक–2025 को लोकसभा ने विपक्ष के कड़े विरोध के बीच पारित कर दिया। सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने संवेदनशील क्षेत्र में निजी कॉरपोरेट समूहों की एंट्री और संभावित जोखिमों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया।

विधेयक पर जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 तक 100 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने में परमाणु ऊर्जा की अहम भूमिका है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा हर समय उपलब्ध नहीं होती, जबकि परमाणु ऊर्जा निरंतर आपूर्ति दे सकती है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के बावजूद सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है। वही सुरक्षा प्रावधान लागू रहेंगे, जो जवाहरलाल नेहरू के समय से चले आ रहे हैं। नुकसान की स्थिति में संचालक की जिम्मेदारी तय होगी और परमाणु उत्तरदायित्व कोष भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब भारत किसी का अनुसरण नहीं करता, बल्कि दुनिया भारत का अनुसरण करती है। कुछ सांसदों द्वारा अरुण जेटली के पुराने विरोध का उल्लेख किए जाने पर उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियां बदल चुकी हैं।

कांग्रेस ने की जेपीसी में भेजने की मांग

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विधेयक को विस्तृत विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2008 में जब परमाणु रंगभेद की नीति को खत्म करने का प्रयास जा रहा था तो भाजपा ने यूपीए सरकार के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को पटरी से उतारने का प्रयास किया था। उन्होंने कहा कि इस बिल में आपूर्तिकर्ता के उत्तरदायित्व का कोई प्रावधान नहीं है।

बिल में जोखिम नजरअंदाज: थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि विधेयक में रेडियोधर्मी विकिरण और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि जोखिम को नगण्य माना जाए तो केंद्र सरकार किसी भी संयंत्र को लाइसेंस या दायित्व से छूट दे सकती है। यह प्रावधान पूरे नियामक ढांचे को कमजोर करता है, क्योंकि इसके जरिए सरकार जब सुविधाजनक समझे, तब किसी भी सुविधा को निगरानी और जवाबदेही से बाहर रखा जा सकता है।

'जी राम–जी' पर चर्चा शुरू

इस बीच लोकसभा में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी–जी राम–जी) विधेयक–2025 पर भी चर्चा शुरू हो गई। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस विधेयक में ग्रामीण रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का प्रावधान किया गया है।

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