14 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लोकसभा में अब 850 सीटें होंगी, केंद्र सरकार का सबसे बड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव, Article 82(3) हटाने का क्या मतलब?

Lok Sabha Seats Increase: केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव लाई है, जिसके लिए संविधान संशोधन बिल का मसौदा तैयार किया गया है, जिससे संसद की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे ताकत भी बढ़ेगी।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

Apr 14, 2026

SANSAD

अब लोकसभा में होंगे 850 सांसद… 543 नहीं। संसद की फोटो (सोर्स: ANI)

Lok Sabha Seats Increase Update 2026: लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद के लिए एक अहम संविधान संशोधन बिल पेश करने की तैयारी कर ली है, जिसके तहत लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। यह कदम देश की जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के नए संतुलन को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए तय की गई हैं।

इस बदलाव की सबसे अहम बात यह है कि 2026 की जनगणना के बाद होने वाले पहले परिसीमन या पुनर्निर्धारण (Delimitation) के आधार पर नई सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही महिला आरक्षण को लागू करने के लिए भी कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 82(3) को हटाने का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे परिसीमन (Delimitation) की समय-सीमा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होगा।

अनुच्छेद 82(3) को हटाने का भी प्रस्ताव; जानिए मतलब

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 82(3) कहता है कि लोकसभा सीटों का नया परिसीमन अभी तुरंत नहीं किया जाएगा। इसे 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े आने तक टाल दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अभी देश में लोकसभा सीटों का बंटवारा 1971 की जनगणना के आधार पर और क्षेत्रीय सीमाएं 2001 के हिसाब से ही चलती रहेंगी। जब तक 2026 के बाद नई जनगणना के आंकड़े सामने नहीं आ जाते, तब तक इन सीटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। बता दें यह आर्टिकल 82 का अहम हिस्सा है।

जानिए परिसीमन का इतिहास?

संविधान कहता है कि हर जनगणना के बाद लोकसभा सीटों का नया बंटवारा होना चाहिए, लेकिन यह काम लंबे समय से टलता रहा है। 1976 में आपातकाल के दौरान इसे पहले 2000 तक रोका गया, फिर 2001 में इसे बढ़ाकर 2026 तक कर दिया गया। अब हालात बदल रहे हैं। नई संसद भवन (सेंट्रल विस्टा) ज्यादा सांसदों की क्षमता के साथ तैयार है, इसलिए सरकार जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की तैयारी में है। यानी सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ किया जा रहा है। अब सभी की नजरें 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां इस बड़े बदलाव पर फैसला हो सकता है।

संसद के विशेष सत्र में होगी चर्चा

बता दें केंद्र सरकार इस संविधान संशोधन बिल को 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक चलने वाली संसद के विशेष सत्र में पेश करने जा रही है। इस बिल की कॉपी पहले ही सांसदों को दे दी गई है ताकि इस पर चर्चा हो सके। लेकिन इसके साथ ही सियासत गरमा गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है।

वहीं OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, इसे पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा, और इसके लिए सरकार को विपक्ष का समर्थन जुटाना पड़ेगा।