
LPG सिलेंडर संकट (AI Image)
LPG Crisis in India: बेंगलुरु के उत्तर-पूर्व इलाके में रहने वाली 30 वर्षीय घरेलू कामगार गीता के लिए अब घर का चूल्हा जलाना रोजाना की चुनौती बन गया है। वजह है एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी कमी, जिसे पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। गीता बताती हैं कि अब सिलेंडर मिलने में कई-कई दिन लग जाते हैं। कई बार तो स्थिति ऐसी हो जाती है कि परिवार को रात देर तक इंतजार करना पड़ता है कि कब खाना बनेगा।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ जगहों पर एलपीजी सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 4,000 से 5,000 रुपये तक में बिक रहे हैं। यह कीमत आम घरेलू कामगारों और मजदूर परिवारों के लिए बिल्कुल भी संभव नहीं है। गीता जैसे कई परिवारों को मजबूरी में सड़क किनारे लकड़ी जलाकर खाना बनाना पड़ रहा है। लेकिन यह भी आसान नहीं है, क्योंकि कई घरों में लकड़ी जलाने की पर्याप्त जगह तक नहीं है।
लगातार गैस की कमी का असर सीधे परिवारों के खानपान पर पड़ रहा है। कई घरों में अब दिन में सिर्फ एक बार ही खाना बन पा रहा है। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य पर असर हो रहा है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है। एक अन्य घरेलू कामगार रत्ना बताती हैं कि उनके घर में कभी गैस तो कभी लकड़ी का सहारा लेना पड़ता है। सिलेंडर मिलने में 15 से 30 दिन तक की देरी आम हो गई है।
यह संकट सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में कई ढाबे और खाने-पीने की दुकानें अब पूरी तरह लकड़ी पर निर्भर हो गई हैं। कुछ दुकानदारों ने बढ़ते खर्च को देखते हुए अपना मेन्यू भी छोटा कर दिया है। हालांकि, कई छोटे व्यापारी अब भी किसी तरह पुराने तरीके से काम चला रहे हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य रूप से चल रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, डिलीवरी सिस्टम OTP वेरिफिकेशन के जरिए सुचारू रूप से काम कर रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। आम लोग लगातार देरी, कमी और बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।
Updated on:
28 Apr 2026 02:54 pm
Published on:
28 Apr 2026 02:50 pm
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