3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Indian Iron Dome: भारत में स्वदेशी आयरन डोम तैयार, मिसाइल के साथ ड्रोन भी नहीं बचेंगे, जानिए इससे देश का सुरक्षा तंत्र कैसे होगा मजबूत

Iron Done made in India: डीआरडीओ ने भारत में बने आयरन डोम का इसी सप्ताह सफल परीक्षण कर लिया है। यह डोम इजरायल के आयरन डोम की तरह तीन स्तरीय होगा। इसकी विशेषताओं के बारे में यहां विस्तार से पढ़ें...

2 min read
Google source verification
Iron Dome Made in India

भारत में तैयार स्वदेशी आयरन डोम का सफल परीक्षण हो गया है

Iron Done made in India: इजरायल के आयरन डोम (Iron Dome), डेविड स्लिंग और ऐरो की तरह भारत भी तीन स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात करने की तैयारी में है। इनके तैयार हो जाने पर भारत किसी भी हवाई हमले की आशंका होने पर पूरी तरह से मुस्तैद रहेगा। इनमें डिफेंस रक्षा प्रणालियों में भारत-इजराइल एमआरएसएएम (Medium Range Surface-to-Air Missile), स्वदेशी रूप से विकसित क्यूआरएसएएम (Quick Reaction Surface-to-Air Missile) और वीएसएचओआरएडीएस (Very Short-Range Air Defence System यानी बहुत कम दूरी के हमलों से निपटने के लिए वायु रक्षा प्रणाली) शामिल हैं।

ये सभी प्रणालियां भारत की तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाती हैं और डीआरडीओ (DRDO) के वायु रक्षा मिसाइल विकास प्रोग्राम के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। इसके साथ ही डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक पर निर्मित डी-4 काउंटर ड्रोन सिस्टम(D-4 Counter Drone System) भी विकसित कर लिया है, जो कि देश के मुख्य संवेदनशील स्थलों पर तैनात किए जा रहे हैं।

MRSAM- मध्यम दूरी के लक्ष्यों को भेदने को क्षमता

Iron Dome made in India: डीआरडीओ (DRDO) के मार्गदर्शन में भारतीय सेना की पूर्वी और दक्षिणी कमानों ने 3 और 4 अप्रैल को ओडिशा तट के डॉ। एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एमआर-एसएएम प्रणाली के चार सफल आपरेशन फ्लाइट परीक्षण किए हैं। इन मिसाइलों ने 55 से 60 किमी तक सीधे हमलों के साथ उच्च गति वाले हवाई लक्ष्यों को रोका और नष्ट कर दिया। परीक्षणों ने लंबी दूरी, कम दूरी, अधिक ऊंचाई और कम ऊंचाई पर लक्ष्यों के खिलाफ सफल प्रदर्शन किया। इसके बाद दो रेजिमेंटों में एमआर-एसएएम प्रणाली को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रत्येक एमआर-एसएएम सिस्टम में एक कमांड-एंड-कंट्रोल यूनिट, ट्रैकिंग रडार, मोबाइल लॉन्चर और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। यह संभावना है कि एमआरएसएएम को अंततः डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के साथ एकीकृत किया जाए।

QRSAM - 30 किमी तक के लक्ष्यों को बना सकेगा निशाना

क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल एक क्षेत्र रक्षा प्रणाली है जिसे सर्च-ऑन-मूव, ट्रैक-ऑन-मूव और फायर-ऑन-शॉर्ट-हॉल्ट ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है। 30 किमी तक के कई लक्ष्यों को निशाना बनाता है। क्यूआरएसएएम प्रणाली का अंतिम परीक्षण भारतीय सेना द्वारा मूल्यांकन परीक्षणों के भाग के रूप में सितंबर 2022 में किया गया था।

VSHORADS - 7 KM की दूरी तक कर सकता है हमला

डीआरडीओ द्वारा विकसित बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए अनुकूलित है। यह मानव द्वारा पोर्टेबल डिवाइस से प्रक्षेपित की जा सकती है। यह 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।
इसका अंतिम परीक्षण 2 फरवरी, 2025 को किया गया था, जब इसने लगातार तीन परीक्षणों में बहुत कम ऊंचाई पर उड़ रहे उच्च गति वाले लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा था।

ड्रोन काउंटर सिस्टमः कई शहरों में तैनाती शुरू

इसके अलावा डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से डी4 (ड्रोन, डिटेक्ट, डिटर और डिस्ट्रॉय) प्रणाली भी विकसित की है, जिसकी घोषणा 27 मार्च को की गई थी। इस प्रणाली को अब शहरों में संवदेनशील संस्थानों में तैनात किया जा रहा है।

Story Loader