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Ajit Pawar और आसमान का वो खूनी मंजर: जब प्लेन क्रैश ने बार-बार बदला भारत का भूगोल

Ajit Pawar plane crash death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का विमान हादसे में निधन। जानिए कैसे इतिहास के हवाई हादसों ने भारतीय राजनीति का रुख मोड़ा है।

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भारत

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MI Zahir

Jan 28, 2026

Ajit Pawar's plane crash

Ajit Pawar's plane crash

Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Plane Crash Death:महाराष्ट्र की राजनीति के 'पावर हाउस' अजित पवार (Ajit Pawar) का बारामती में एक विमान हादसे में निधन केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह भारत के उस काले इतिहास की याद दिलाता है, जहां आसमान (Plane Crash History) ने देश के कई दिग्गज नेताओं को हमसे छीन लिया। 28 जनवरी 2026 की यह घटना एक बार फिर सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर गई है। अजित पवार, जिन्हें महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) का 'मैनेजमेंट गुरु' कहा जाता था, हमेशा समय के पाबंद रहे। आज भी वे एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए निकले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। लैंडिंग से कुछ मिनट पहले हुए इस हादसे ने न केवल एक उपमुख्यमंत्री को छीना, बल्कि राज्य की सत्ता के समीकरणों को भी पूरी तरह उलट-पुलट कर दिया। उनके जाने से बारामती से लेकर मुंबई तक एक ऐसा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना नामुमकिन नजर आता है।

इतिहास के जख्म हुए ताजा

अजित पवार का यह हादसा हमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की याद दिलाता है, जिनका विमान 1965 के युद्ध के दौरान क्रैश हो गया था। भारत के राजनीतिक इतिहास में विमान हादसे हमेशा से बड़े बदलावों का कारण रहे हैं। संजय गांधी से लेकर माधवराव सिंधिया और वाईएस राजशेखर रेड्डी तक, आसमान ने हमेशा राजनीति के चमकते सितारों को असमय ही लील लिया। अजित पवार का नाम भी अब उसी फेहरिस्त में जुड़ गया है, जो बताता है कि सत्ता की बुलंदियों पर बैठे नेताओं का सफर कितना जोखिम भरा हो सकता है।

फाइलों का बादशाह और जमीन का नेता

अजित पवार की सबसे बड़ी ताकत उनका प्रशासनिक कौशल था। वे एक ऐसे नेता थे जो अधिकारियों की फाइलों में कमियां निकालने और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए जाने जाते थे। उनकी कार्यशैली 'रिजल्ट ओरिएंटेड' थी। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो मंत्रालय के गलियारों में उनकी वो कड़क आवाज और अनुशासन की कमी खलेगी। उन्होंने राजनीति को भाषणों से ज्यादा ठोस फैसलों से चलाया।

स्तब्ध है राजनीतिक जगत

शरद पवार: "अजित ने हमेशा अपनी राह खुद चुनी, लेकिन उसका इस तरह जाना परिवार और पार्टी के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई शब्द नहीं कर सकते।"

देवेंद्र फडणवीस: "अजित दादा एक बेहतरीन साथी और कुशल प्रशासक थे। महाराष्ट्र के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।"

आम कार्यकर्ता: पुणे और बारामती की सड़कों पर सन्नाटा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अपना 'दादा' (बड़ा भाई) खो दिया है।

अब आगे क्या होगा ?

अजित पवार के निधन के बाद अब सबकी नजरें उनकी पार्टी (NCP) के भविष्य पर हैं। महायुति गठबंधन में उनकी जगह कौन लेगा और बारामती की विरासत का अगला वारिस कौन होगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ होगा। साथ ही, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच कर रहा है ताकि दुर्घटना के सही कारणों का पता चल सके।

सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर सवाल

यह हादसा एक बड़ा सवाल छोड़ गया है-क्या वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा और विमानों के रखरखाव में कोई चूक हुई? पुराने विमानों का इस्तेमाल और खराब मौसम के बावजूद उड़ान भरना अक्सर ऐसे हादसों की वजह बनता रहा है। अजित पवार जैसे कद्दावर नेता का इस तरह जाना भारतीय सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा सबक है।