
डिपोर्टेशन पर बवाल (पत्रिका)
बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करने की मुहिम के बीच एक नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र पुलिस ने जिन्हें घुसपैठिए बताकर बांग्लादेश भेज दिया था, उन्हें भारतीय नागरिक बताकर बंगाल पुलिस ने वापस बुलाया है। इस मुद्दे पर दोनों राज्य आमने सामने हैं। महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि वैध दस्तावेज पेश न करने के कारण उन्हें भेजा गया।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद निवासी महबूब शेख सहित 5 लोगों को महाराष्ट्र पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी होने के शक में पकड़कर बीएसएफ को सौंप दिया। बीएसएफ ने 15 जून को पांचों को पहले बांग्लादेश बॉर्डर स्थित डिटेंशन कैंप में भेजा और फिर बांग्लादेश रवाना कर दिया। इसकी जानकारी मिलने पर बंगाल सरकार ने दखल दिया। बंगाल पुलिस के मुताबिक डिपोर्ट किए गए चार लोग मुर्शिदाबाद और एक बर्धमान जिले का रहने वाला है। बंगाल पुलिस ने बीएसएफ के साथ मीटिंग कर पांचों के भारतीय नागरिक होने के समर्थन में दस्तावेज सौंपे। इस पर बीएसएफ ने बांग्लादेश की सिक्योरिटी फोर्स के साथ फ्लैग मीटिंग कर पांचों की वापसी सुनिश्चित कराई।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मसले पर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले नागरिकों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगाते हुए कहा कि जिन बंगालियों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें भी अवैध बांग्लादेशी प्रवासी बताकर कार्रवाई की जा रही है। सीएम ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया। हालांकि भाजपा सदस्यों ने सदन में ममता के दावों को खारिज किया।
उधर, देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ धरपकड़ अभियान जारी है। गुजरात पुलिस ने 100 घंटों में राज्य भर से लगभग 200 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पकड़ा। निर्वासन के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई प्रगति पर है। इसके अलावा दिल्ली के वसंत कुंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने 17 अवैध बांग्लादेशियों को गिरफ्तार करने के बाद उनको वापस भेजने के लिए निर्वासन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Published on:
20 Jun 2025 09:04 am
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