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मैतेई को सेना, कुकी को मणिपुर कमांडो फोर्स पर भरोसा नहीं… ‘राज्य में गृहयुद्ध जैसे हालात’

Manipur Burning: मणिपुर के लोगों को राज्य में हो रही हिंसा के दौरान खुद की सुरक्षा की चिंता सताने लगी हैं। इसके लिए वह खुद से हथियार उठा रहे हैं। मणिपुर हिंसा पर पढ़िए पत्रिका टीम की एक और ग्राउंड रिपोर्ट…

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 Maitai don't trust army, Kuki don't trust Manipur Commando Force

3 मई 2023 को मणिपुर में सबसे पहले जातीय हिंसा की शुरुआत हुई थी। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल किए जाने की मांग के विरोध में कुकी समाज के लोगों के द्वारा पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था। तब से चल रही हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और घायलों की तो कोई गिनती ही नहीं। सरकार ने हिंसा को काबू करने के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी, गृहमंत्री ने तुरंत मदद भेजी, खुद राज्य के दौरे पर भी गए।

मानसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ने भी मणिपुर के लोगों से हिंसा न करने की अपील की। लेकिन राज्य के लोग मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में पत्रिका के रिपोर्टर विकास सिंह ने ग्राउंड से पड़ताल की और पता किया की आखिर क्या वजह है जो राज्य में हिंसा रूकने का नाम नहीं ले रही है?

मैतेई को सेना, कुकी को मणिपुर कमांडो फोर्स पर भरोसा नहीं

पत्रिका के रिपोर्टर विकास ने जब मणिपुर के मैतेई समाज के लोगों से पूछा कि आखिर क्या कारण है कि राज्य में हिंसा नहीं रूक रही तो उन लोगों ने चौंकाने वाले जवाब दिए। लोगों ने बताया कि पहाड़ पर रहने वाले कुकी लोग उनके लोगों को मार रहे हैं। इसलिए वह लोग अपनी सुरक्षा के लिए पलटवार कर रहे। इस पर जब उनसे कहा जाता है कि सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए ही सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेस को भेजा है इस पर वह कहते है कि उन्हें सेना पर भरोसा नहीं है।

कुकी लोग सेना के साथ मिलकर उनपर हमला कर रहे हैं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इसको लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। एक बात और है कि पिछले कई समय से इंफाल आने वाली सेना की गाड़ीयों का मैतई समाज की औरते चेकिंग करती हैं।

आधार कार्ड देखखर हथियार दे रही पुलिस

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान कुछ लोगों ने नाम न बताने और पहचान उजागर न करने के शर्त पर दावा किया कि सरकार के कहने पर पुलिस मैतेई लोगों का आधार कार्ड देखकर उन्हें हथियार दे रही है। हालांकि हम एक बार फिर से बता दें कि ये दावा पत्रिका या उसके रिपोर्टर की तरफ से नहीं किया जा रहा है। वहीं राज्य के कानून मंत्री ने पत्रिका से बात करते हुए कहा कि जल्द ही मणिपुर में हालात काबू में आ जाएंगे। कुछ लोग ऐसी अफवाह जरूर फैला रहे हैं लेकिन ये बात सच नहीं है।

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राज्य में गृहयुद्ध जैसे हालात

पत्रिका की पड़ताल में एक बात खुलकर सामने आई है कि राज्य में दोनों समुदाय (कुकी और मैतई) के लोग एक दूसरे के जान के प्यासे बन चुके हैं। वह जब भी मौका पाते है एक-दूसरे पर हमला कर देते है। उनका मानना है कि सरकार उनके साथ हिंसा होने से नहीं रोक पा रही है। इसलिए उन्हें खुद अपनी और अपने समाज की सुरक्षा करनी पड़ेगी। यहां सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि यहां 20 साल के बच्चे भी आधुनिक हथियार लेकर चल रहे हैं और गोली चलाने से डर नहीं रहे।

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