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बंगाल में TMC की जड़ें हो रही हैं कमजोर? सिंडिकेट नेटवर्क में पड़ने लगी बड़ी दरार

TMC Syndicate: क्या बंगाल में TMC की पकड़ कमजोर पड़ रही है? सिंडिकेट राज, कट मनी के आरोप और बढ़ते विरोध के बीच अब जमीनी स्तर पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

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भारत

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Saurabh Mall

Jun 14, 2026

tmc mamta banrjee

फोटो में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी (इमेज सोर्स: ANI)

BJP vs TMC: पश्चिम बंगाल में खेला शुरू हो गया है। टीएमसी कार्यकर्ता और नेता की मुश्किलें बढ़ती जा रहा है। शुभेन्दु सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने ही गढ़ में विरोध का सामना कर रही है। एक तरफ उनके ही सांसद और विधायक बगावत कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी पर लंबे समय से लग रहे सिंडिकेट राज और कट-मनी जैसे आरोप भी लोगों के गुस्से की वजह बनते दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि कई जगहों पर TMC से जुड़े संगठन और समर्थक भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं।

टीएमसी का ढहता किला!

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में बदलाव साफ नजर आ रहा है। यहां एक ऑटोरिक्शा यूनियन का दफ्तर, जो पहले TMC समर्थित ‘इंडियन नेशनल तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ से जुड़ा था, अब भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले काम कर रहा है। वहां अब भगवा झंडा दिखाई दे रहा है, जहां कभी तृणमूल कांग्रेस का झंडा लगा होता था। स्थानीय ऑटो चालकों का आरोप है कि उन्हें हर महीने कथित तौर पर अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता था। ऐसे आरोपों के चलते कई लोग अब टीएमसी से दूरी बना रहे हैं और भाजपा की ओर देख रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ एक यूनियन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जमीनी राजनीति में बदलते रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सिंडिकेट सिस्टम... नेताओं के खिलाफ बढ़ा विरोध

बंगाल में सिंडिकेट सिस्टम की शुरुआत लेफ्ट के दौरान मानी जाती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि TMC के शासन में इसका दायरा और बढ़ गया। निर्माण कार्य, मजदूर सप्लाई, रेत खनन और जमीन से जुड़े मामलों में सिंडिकेट की चर्चा अक्सर होती रही है। हाल के महीनों में कई TMC नेताओं को जनता के विरोध और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है। पार्टी को अब सिर्फ राजनीतिक विपक्ष ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बढ़ती नाराजगी की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।

जी-जान से लड़ रही हैं ममता बनर्जी

TMC टूट रही है। जमीनी लेवल पर भी दरार फैल रही है। ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बनाए रखने के लिए जी-जान से लड़ रही हैं। चुनाव नतीजों के बाद माहौल तेजी से बदला है। सोनारपुर के स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जिन TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं का इलाके में दबदबा था, वे अब कम दिखाई दे रहे हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया कि वर्षों तक डर और दबाव के कारण वे अपनी शिकायतें खुलकर नहीं रख पाए।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ रिपोर्ट के मुताबिक, रूपाली मंडल ने दावा किया कि उनकी दुकान तोड़ दी गई थी और मदद नहीं मिली, लेकिन अब वह वापस अपने घर लौट आई हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चुनाव के बाद पुलिस ने शिकायतों पर कार्रवाई शुरू की है। स्थानीय BJP नेताओं का दावा है कि अब लोग खुलकर अपनी समस्याएं बता रहे हैं।

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