
ममता बनर्जी (फोटो- एएनआई)
पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर तनाव बना हुआ है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार आपत्ति जताती रही हैं और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताती रही हैं। अब इस राजनीतिक और कानूनी संघर्ष को उन्होंने एक अलग ही रूप दिया है। ममता बनर्जी ने अब SIR विरोध का साहित्यिक रास्ता चुनते हुए 26 कविताओं की एक पुस्तक लिखी है, जिसमें उन्होंने अपने आक्रोश और प्रतिरोध को शब्दों में ढाला है।
'SIR: 26 इन 26' नामक इस किताब का विमोचन 22 जनवरी को 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में किया गया। इस पुस्तक में कविताओं के पैनिक, डूम, मॉकरी, फाइट, डेमोक्रेसी और हू इज टू ब्लेम जैसे दिलचस्प शिर्षक है। ममता बनर्जी ने इस किताब को उन लोगों को समर्पित किया है जिन्होंने इस विनाशकारी खेल में अपनी जान गंवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के लोगों पर डर का लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ये कविताएं प्रतिरोध की भावना से जन्मी हैं।
डूम शीर्षक कविता में ममता बनर्जी लिखती हैं कि चुप्पी शांति नहीं बल्कि गिरती हुई जिंदगियों का संकेत है। कविता में जनता के सवालों और पीपल्स कोर्ट में जवाब मिलने की बात कही गई है। वहीं मॉर्ग कविता में लोकतंत्र को पीटा जा रहा है और एजेंसी राज के साये में विरोध के दबने का आरोप लगाया गया है। इन पंक्तियों के जरिए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा किया है और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने यह पूरी किताब यात्रा के दौरान महज तीन दिनों में लिखी। उन्होंने कहा कि उनके नाम अब तक 163 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि वह पूर्व सांसद होने के बावजूद कोई पेंशन नहीं लेतीं और मुख्यमंत्री के रूप में भी वेतन नहीं ले रही हैं। उनके अनुसार, उनके निजी खर्च किताबों और रचनात्मक कार्यों से मिलने वाली रॉयल्टी से पूरे होते हैं।
Published on:
04 Feb 2026 11:54 am
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