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Manipur Violence: मणिपुर में अज्ञात बंदूकधरियों और सेना के बीच गोलीबारी, कांग्रेस ने की ये मांग

Manipur Violence: मणिपुर में बीते करीब डेढ़ महीने से ज्यादा समय से जातीय हिंसा जारी है। अज्ञात उपद्रवियों और सुरक्षाबलों के बीच लगातार गोलीबारी की खबरें सामने आ रही हैं। आज सुबह राजधानी इंफाल में फिर गोलीबारी हुई है। असम राइफल्स के जवान गोली चलाने वालों की तलाश कर रहे हैं।

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दुश्मन देश की सेना की तरह बंकर बनाकर गोलीबारी करते थे उपद्रवी, वीडियो देख रह जाएंगे दंग

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manipur violenceमणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही। यहां से लगातार गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं। राजधानी इंफाल में गुरुवार 22 जून की सुबह फिर से गोलीबारी हुई है। अबतक मिली जानकारी के मुताबिक असम राइफल्स और उपद्रवियों के बीच गोलीबारी की ये घटना सुबह पांच बजे इंफाल पश्चिम जिले के उत्तरी बोलजंग इलाके में हुआ है। बंदूकधारियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अज्ञात बंदूकधारियों और असम राइफल्स के जवानों के बीच गोलीबारी की घटना हुई है, लेकिन जवान भी अलर्ट थे, उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई की। अच्छी बात यह है की इस गोलीबारी में कोई जवान घायल नहीं हुआ।


बुधवार शाम भी हुई थी गोलीबारी

मणिपुर में हर रोज गोलीबारी हो रही है, इस पर रोक नहीं लग पा रहा है। बीती शाम भी इंफाल पूर्वी जिले में उरंगपत के पास ऑटोमेटिक हथियारों से फायरिंग की आवाज सुनी गई थी। उसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा हरोथेल की ओर भी फायरिंग की भी खबरें आईं। इसके बाद शांति व्यवस्था कायम करने के लिए तैनात असम राइफल्स के जवानों ने मोर्चा संभाला और शाम करीब साढ़े सात बजे स्थिति पर काबू पा लिया।

गृहमंत्री ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

राज्य में जारी जातीय हिंसा पर विपक्ष बार-बार यह सवाल उठा रहा था की सरकार स्थिति को सुधारने के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रही है, यह सरकार के अहंकार को दर्शाता है। लेकिन कल खबर आई की गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर नई दिल्ली में 24 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट करके बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नई दिल्ली में 24 जून को दोपहर तीन बजे सत्तारूढ़ और सभी विपक्षी दलों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

दिल्ली में नहीं होनी चाहिए बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को लेकर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का मानना है कि राज्य में शांति का कोई भी प्रयास प्रदेश में ही होना चाहिए और दिल्ली में बैठक करने से गंभीरता का अभाव नजर आएगा। अगर यह बैठक राज्य में होती तो वहां के लोगों को सरकार और प्रशासन पर भरोसा बढ़ता।

पार्टी के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि मणिपुर में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार का अब तक सत्ता में बने रहना और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन का लागू नहीं किया जाना सरासर मजाक है। वेणुगोपाल ने ट्वीट करते हुए कहा की मणिपुर में 50 दिनों की तबाही और मौतों के बहुत देर बाद गृहमंत्री अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मणिपुर के लोगों को सोनिया गांधी जी द्वारा संबोधित किए जाने के बाद सरकार जागी है।


पूरा मामला जानिए

बता दें कि, अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद पहली बार 3 मई को झड़पें हुई थीं। मेइती समुदाय मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय नागा और कुकी जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं। राज्य में शांति बहाल करने के लिए करीब 10,000 सेना और असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है।

लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है, जिस कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब तक इस हिंसा में 105 लोगों की जान जा चुकी है और 350 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। केंद्र की मोदी और राज्य की बिरेन सरकार अब तक इस मसले पर पूरी तरह विफल दिखी है।