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Manipur Violence:10 बंकरों से घिरा गांव: हमले के डर से किसी ‘किले’ में बदला, अपनी सुरक्षा के लिए खुद उठाए हथियार

Manipur violence: पिछले तीन महीने से मणिपुर जातीय हिंसा में जल रहा है। मैतई और कुकी एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। कैसे लोग अपनी जान बचाने के लिए अपने ही गांव में बंकर बनाकर रहने को मजबूर हो गए हैं। इस पर पढ़िए पत्रिका की खास रिपोर्ट…

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 Manipur violence Village surrounded by 10 bunkers Anticipating attack


बंकर में रहने को मजबूर गांव वाले

मणिपुर में लगातार हो रही हिंसा के चलते गांव के लोग अपनी सुरक्षा के लिए कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं। इम्फाल वेस्ट का गांव सिंगदा 3 मई की हिंसा के बाद इस तरह से किले में तब्दील हो गया मानो वह दुश्मन देश की बॉर्डर हो। ये गांव मैतई समुदाय का है और इससे सटे पहाड़ पर कुकी लोगों की आबादी है। ऐसे में यहां एकदम आमने-सामने की लड़ाई के हालात हैं। इसी को देखते हुए मैतई लोगों ने गांव में 10 बंकर बनाए हैं। इन बंकरों में 6-6 लोग हथियारों के साथ तैनात रहते हैं।

कुकी गांव की ओर जाने वाले रास्तों में खोद दी खाई

सिंगदा गांव से कुकी आबादी की ओर जाने वाले रास्तों में खाई खोद दी गई है। ताकि इन रास्तों से ना कोई आ सके ना जा सके। पत्रिका रिपोर्टर विकास को गांव के लोगों ने बताया कि करीब 750 लोगों की आबादी इस गांव की है। करीब 200 लोग रोजगार के लिए बाहर हैं। अब जो लोग गांव में हैं, वो पूरी तरह खुद को वार जॉन में पा रहे हैं। किसी मिलिट्री कैंप की तरह टुकड़ियां बनाई गई हैं। बाकायदा शिफ्ट वाइज बंकरों में ड्यूटी लगता है। एक बंकर के लोग दूसरे बंकर के लोगों से वायरलेस के जरिए जुड़े रहते हैं।


सुरक्षाबलों पर भरोसा कम! खुद उठाए हथियार

इस गांव के पास ही स्कूल में सुरक्षाबल कैंप कर रहे हैं। लेकिन गांव के लोग खुद ही हथियार संभालकर सुरक्षा में जुटे हैं। गांव के ज्यादातर मर्द जहां सिक्योरिटी के लिए अपनी ड्यूटी दे रहे हैं तो वहीं औरतें भी गुट बनाकर रह रही हैं। गांव की बड़ी और मजबूत इमारतों को गांव की औरतों ने ठिकाना बना लिया हैं। यहीं सब मिलकर खाना बनाती हैं और यहीं सो जाती हैं। जितना भी काम होता है, वो रोशनी में निपटा लिया जाता है। अंधेरा होने के बाद गांव में बच्चा और औरत तो क्या कोई पुरुष भी नहीं दिखता है।


24 मई को गांव पर हुई थी अंधाधुंध फायरिंग

गांव के लोगों का कहना है कि 24 मई को उनके गांव पर कुकी लोगों ने हमला कर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं, जिसके बाद से वो बहुत ज्यादा चौकन्ने रहने लगे हैं। कुकी ट्राइबल ग्रुप गांव से महज 30-35 फीट की दूरी पर यानी एकदम सटा हुआ है। ऐसे में ये गांव किसी आम गांव की बजाय जंग का मैदान जैसा बन गया है। इस गांव के लोगों से बात हुई तो सबने सरकार से यही अपील की है कि जल्दी से जल्दी उनके राज्य की शांति लौटाने के लिए काम करें। ताकि वो फिर से आम जिंदगी शुरू कर सकें।

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