
Manmohan Singh Death: भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने वाले डॉ. मनमोहन सिंह को देश में आर्थिक सुधारों के निर्माता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 22 मई, 2004 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और 26 मई, 2014 तक दो कार्यकाल पूरे किए। कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार का नेतृत्व करते हुए, उन्होंने कुल 3,656 दिनों तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया, और इस तरह वे भारत के इतिहास में तीसरे सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बने, उनसे पहले केवल जवाहरलाल नेहरू (6,130 दिन) और इंदिरा गांधी (5,829 दिन) थे। 26 सितंबर, 1932 को पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र के गाह गांव में जन्मे सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की।
सिंह का सरकारी सेवा में लंबा और शानदार करियर रहा है। उन्होंने 1971 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में विदेश व्यापार मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। 1972 में वे वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बने, इस पद पर वे 1976 तक रहे।
1991 में, जब भारत आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। सिंह ने रुपये का अवमूल्यन किया, करों को कम किया, सरकारी उद्योगों का निजीकरण किया और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया, जिनसे देश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे और 1991 में राज्यसभा में शामिल हुए। सिंह 1996 तक वित्त मंत्री रहे, लेकिन 1999 में लोकसभा चुनाव में हार गए।
कांग्रेस ने 2004 के संसदीय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) को हराया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद से इनकार किया और सिंह को प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना। सिंह ने सरकार बनाई और पदभार संभाला। उनके मुख्य लक्ष्यों में भारत के गरीबों की स्थिति सुधारना, पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करना और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच रिश्तों में सुधार करना था।
सिंह ने तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की दिशा में काम किया, लेकिन ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई, जिसने गरीबों को सब्सिडी प्रदान करने में मुश्किलें पैदा कीं। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने 2005 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के साथ परमाणु सहयोग समझौता किया। इस समझौते से भारत को परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन और प्रौद्योगिकी प्राप्त करने की अनुमति मिलती थी, लेकिन इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध हुआ। 2008 में इस समझौते पर आगे बढ़ने के बाद, सिंह की सरकार को संसद में विश्वास मत का सामना करना पड़ा, और यह प्रक्रिया भ्रष्टाचार और वोटों की खरीद-फरोख्त के आरोपों से प्रभावित हुई।
मई 2009 के चुनावों में कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई और सिंह ने दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। हालांकि, भारत की आर्थिक वृद्धि में मंदी और कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनके दूसरे कार्यकाल में सरकार की लोकप्रियता को प्रभावित किया। 2014 में सिंह ने घोषणा की कि वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश नहीं करेंगे, और 26 मई को उन्होंने पद छोड़ दिया, उसी दिन जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
Updated on:
26 Dec 2024 10:37 pm
Published on:
26 Dec 2024 10:37 pm
