लेडीज स्पेशल स्टेशन की मास्टर (प्रबंधक) होने का गौरव प्राप्त करने वाली ममता का कहना है, हमारा अनुभव बहुत अच्छा रहा या कह सकते हैं कि कुछ जादुई सा रहा। रेलवे के साथ 25 वर्षों के अपने कॅरियर में मैंने कभी भी सभी महिला कर्मचारियों के साथ काम करने की नहीं सोची थी। शुरू में भले ही हमें कुछ परेशानियां हुईं, लेकिन अब नौकरी की जिम्मेदारी के रूप में हम आगे बढ़ रहे हैं। हम एक परिवार की तरह काम कर रहे हैं। जिम्मेदारी और सहयोग की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। वे बोलीं, उदाहरण के लिए कीर्ति कोठाणे को लें। उन्होंने कभी भी दुर्घटनाओं के मामलों को अपने हाथ में नहीं लिया था, लेकिन अब उन्होंने इस तरह के मामलों से निपटना सीख लिया है।