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9 दिन और सताएगी जून की गर्मी, मॉनसून इस तारीख से दिलाएगा राहत

आंकड़ों की मानें तो देश की आधी खेती-बाड़ी के लिए सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वे पूरी तरह से जून से सितंबर के बीच रहने वाले मॉनसून के पानी पर निर्भर हैं।

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भारत

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Ashish Deep

Jun 02, 2025

The monsoon arrived in India with considerable speed, but its progress has now slowed

मॉनसून ने भारत में तेजी से प्रवेश किया लेकिन अब इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इस कारण देशवासियों को जून की गर्मी का कहर 9 दिन और झेलना पड़ेगा। 16 साल बाद समय से पहले आए मॉनसून के 11-12 जून से फिर से पूरी रफ्तार के साथ सक्रिय होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के एक विज्ञानी ने यह जानकारी दी है।

झीलों के पानी का स्रोत भी मॉनसून

4 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मॉनसून ही है। यह देश के 70 फीसद क्षेत्र को कवर करता है और फसलों की जीवन रेखा पानी को पहुंचाता है। साथ ही डैम और झीलों के पानी का स्रोत भी यही है। आंकड़ों की मानें तो देश की आधी खेती-बाड़ी के लिए सीधी सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वे पूरी तरह से जून से सितंबर के बीच रहने वाले मॉनसून के पानी पर निर्भर हैं।

11-12 जून के दरम्यान इसमें तेजी

मौसम विभाग के पुणे स्थित केंद्र के विज्ञानी एसडी सनन ने कहा कि मॉनसून की रफ्तार बीते कुछ दिन में सुस्त पड़ी है और फिर 11-12 जून के दरम्यान इसमें तेजी आएगी। इसके बाद यह देशभर के बचे हुए हिस्से को कवर करेगा।

मॉनसून 24 मई को केरल के रास्ते आया

बता दें कि मॉनसून 24 मई को केरल के रास्ते देश में आया और फिर दक्षिण, उत्तर पश्चिम और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में पहुंच गया। लेकिन कुछ दिनों बाद इसकी रफ्तार घटने लगी। मौसम विभाग ने इसका पूरा चार्ट तैयार किया है कि कब से मॉनसून किन-किन इलाकों में डाउन होने लगा।

बंगाल की खाड़ी से फिर होगा सक्रिय

मौसम विभाग के मुताबिक 11 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में बदलाव आएगा और देश के उत्तरी इलाकों में बारिश का माहौल बनेगा। केरल में 1 जून से मॉनसून की बारिश होने की संभावना रहती है और यह जुलाई मध्य तक पूरे देश में फैल जाता है। इससे किसानों को धान समेत दूसरी फसलों को रोपने का समय मिल जाता है।

किसानों के चेहरे पर खुशी

मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून के पहले आने से किसानों के चेहरे पर खुशी है। इसके पहले आने से उन्हें हैरानी भी हुई है। मुंबई के एक ट्रेडर ने कहा कि जब तक बारिश तेज नहीं होती तब तक किसानों ने सोयाबीन, कपास और गर्मी की दूसरी फसलों को बोने का फैसला किया है। वे मिट्टी के और पानी सोखने का इंतजार कर रहे हैं।

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