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इटली में बना दूसरे विश्व युद्ध के जाबांज भारतीय सैनिकों के सम्मान में स्मारक

- भारतीयों ने जीते थे छह विक्टोरिया क्रॉस अवार्ड

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इटली में बना दूसरे विश्व युद्ध के जाबांज भारतीय सैनिकों के सम्मान में स्मारक

इटली में बना दूसरे विश्व युद्ध के जाबांज भारतीय सैनिकों के सम्मान में स्मारक

नई दिल्ली। दूसरे विश्व युद्ध के इतालवी अभियान दौरान के दौरान भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए में इटली में स्मारक बनाया गया है।

अभियान के दौरान ऊपरी तिबर घाटी की ऊंचाइयों पर युद्ध में प्राणोत्सर्ग करने वाले विक्टोरिया क्रॉस विजेता भारतीय नायक यशवंत घाडगे की याद में मोंटोन (पेरुगिया, इटली) में 'वी.सी. यशवंत घाडगे सनडायल मेमोरियल' का शनिवार को अनावरण किया गया। इतालवी अभियान में लड़ने वाले भारतीय सेना के सभी रैंकों के वीरतापूर्ण बलिदान की स्मृति में स्मारक पर भारतीय सेना की एक पट्टिका लगाई गई है। इटली में भारत की राजदूत डॉ. नीना मल्होत्रा और भारतीय रक्षा अटैची कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में इतालवी नागरिक, विशिष्ट अतिथि और इतालवी सशस्त्र बलों के सदस्य भी उपस्थित थे।

यह स्मारक एक कार्यरत धूप घड़ी (सनडायल) के रूप में है। स्मारक का आदर्श वाक्य 'ओमाइंस सब ईओडेम सोल' है जिसका अंग्रेजी में अनुवाद ' हम सभी एक ही सूर्य के नीचे रहते हैं' है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इतालवी अभियान के दौरान योगदान का सम्मान करते हुए इस स्मारक का उद्घाटन इस तथ्य का प्रमाण है कि इटली द्वितीय विश्व युद्ध के इतालवी अभियान के दौरान भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान और योगदान का बहुत सम्मान करता है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। चौथी, 8वीं और 10वीं डिविजन के 50 हजार से अधिक भारतीय सैनिकों ने इतालवी अभियान में बहादुरी दिखाई और 5,782 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इस बहादुरी के लिए दिए गए 20 विक्टोरिया क्रॉस में से छह भारतीय सैनिकों ने जीते थे। उनके इस अदम्य साहस का पूरे इटली में फैले 40 राष्ट्रमंडल युद्ध समाधि स्थलों पर स्मरण किया जाता है।