
Mukhtar Ansari: मुख्तार अंसारी। 6 फीट 3 इंच के इस कुख्यात अपराधी राजनीतिज्ञ ने पूर्वांचल को पहले ही हिला रखा था लेकिन पूरा उत्तरप्रदेश उस दिन हिल गया जब यह बात सामने आई थी तत्कालीन भाजपा विधायक की हत्या के लिए भारतीय सेना के एक भगोड़े से एलएमजी खरीदने की कोशिश कर रहा है। भगोड़े पकड़े गए उन्होंने इसे कबूला।कृष्णानंद राय बुलेट प्रुफ गाड़ी में चलते थे ऐसे में उन्हें मारने के लिए 60 सेकेंड में 800 गोली दगाने वाली एलएमजी की जरूरत अंसारी को थी। इसका खुलासा होते ही पहली बार अंसारी पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। यहीं से वह गैंगेस्टर मुख्तार अंसारी हो गया।
भारतीय सेना के साथ मुख्तार का नाम आपराधिक गतिविधि में आया लेकिन मुख्तार के परिवार का भारतीय सेना के साथ एक जुड़ाव ऐसा भी है जिस पर संपूर्ण राष्ट्र गर्व करता है। बात कर रहे हैं मुख्तार के नाना, नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर उस्मान की। आज जम्मू कश्मीर का राजौरी जिला बिग्रेडियर उस्मान के अदम्य साहस की देन है। ब्रिगेडियर उस्मान के नेतृत्व में छोटी टुकड़ी ने पाकिस्तान के 1000 कबाइलियों को मारकर नौशेरा को दोबारा अपने कब्जे में लिया था।
आजादी के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया। भारतीय सेना ने ब्रिगेडियर उस्मान को पुंछ और झांगर को पाकिस्तानियों से मुक्त कराने का जिम्मा दिया। इसके बाद ब्रिगेडियर उस्मान ने शपथ ली कि जब तक इलाका पाकिस्तानियों से मुक्त नहीं होता वह जमीन पर सोएंगे। लड़ाई अब इतिहास है। उस समय उन्होंने कहा था “पूरी दुनिया की नज़र हम पर है…देर-सबेर मौत आनी तय है. लेकिन युद्ध के मैदान में मरने से बेहतर और क्या हो सकता है.”
भारत पाकिस्तान बंटवारे के दौरान ब्रिगेडियर उस्मान को मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान का सेना प्रमुख बनने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने नकार दिया। राजौरी में पाकिस्तानियों के साथ हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा बुरा हाल किया कि पाकिस्तानियों ने उन पर 50 हजार का ईनाम रख दिया। 3 जुलाई 1948 की शाम को ब्रिगेडियर उस्मान ब्रिगेड मुख्यालय में टहल रहे थे। इसी दौरान एक गोला ब्रिगेडियर उस्मान के करीब गिरा और भारत का सबसे वरिष्ठ सैन्य कमांडर युद्ध के मैदान में शहीद हो गया। उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया।
मुख्तार के दादा डॉ. एमए अंसारी के कद का अंदाजा इससे पता लगता है कि पुरानी दिल्ली के दरियागंज में उनके नाम पर अंसारी रोड है और जहां एम्स है उसका नाम भी अंसारी नगर है। वह जामिया मिलिया इस्लामिकया के ना केवल संस्थापक सदस्य थे बल्कि इस संस्थान के चांसलर भी बने। 1924 में हिंदू मुस्लिम एकता को बनाने में उन्होंने बहुत मदद की।
Updated on:
29 Mar 2024 06:15 pm
Published on:
29 Mar 2024 06:13 pm
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