
3 महीने से ज्यादा समय से मणिपुर में हिंसा जारी है। हालांकि पिछले 12 दिनों से घाटी में शांति थी। हिंसा पर रोक लग गई थी लेकिन शुक्रवार की सुबह उखरुल के थोवई कुकी गांव में उपद्रवियों ने गोलीबारी की जिसमें 3 नागा युवकों की मौत हो गई है। मणिपुर पुलिस ने घटना की पुष्टि की है। मरने वाले तीनों लोग नागा समुदाय के बताए जा रहे हैं।
इस हमले के पीछे मैतेई समुदाय का हाथ बताया जा रह है। फिलहाल पुलिस गोलीबारी करने वालों की पहचान करने में जुटी है। लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या कुकी और मैतई के लड़ाई में अब नागा भी कूद पड़े हैं? अगर इसका जवाब हां में है तो वह किसकी तरफ से लड़ रहे हैं। ये जांच के साथ ही राज्य और केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय है।
1990 में नागाओं और कुकियों के बीच हुई थी हिंसक झड़प
बता दें कि नागा और कुकी समुदाय के बीच भी कुकी संघर्ष का इतिहास रहा है। आखिरी बार 1990 के दशक में नागाओं और कुकियों के बीच हिंसक झड़पें देखी गईं, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए। उस समय जमीन को लेकर दोनों समुदाय के बीच संघर्ष हुआ था. दरअसल, मणिपुर की पहाड़ियों में कुकी अपनी "मातृभूमि" होने का दावा करते हैं।
इसका बड़ा हिस्सा ग्रेटर नागालैंड या नागालिम के साथ ओवरलैप हो गया था, जिसे नागा अपनी मातृभूमि मानते हैं। इसी को लेकर 90 के दशक में दोनों समुदायों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला था।
कुकी-जो विधायकों ने विधानसभा बहिष्कार का ऐलान किया
कुकी नेता और बीजेपी विधायक पौलेनलाल हाओकिप ने कहा कि मणिपुर के 10 कुकी-जो विधायक अपने समुदाय पर हमलों के विरोध में सोमवार को होने वाले विशेष विधानसभा सत्र में शामिल नहीं होंगे. वे एक अलग प्रशासन की अपनी मांग पर कायम हैं, क्योंकि मैतेई और कुकी-जो लोगों के बीच स्पष्ट भौगोलिक और जनसांख्यिकीय विभाजन रहा है. वहीं 6 अगस्त को ही कुकी पीपुल्स अलायंस के दो विधायकों ने एन बीरेन सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।
विवाद का कारण जानिए
कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला है, लेकिन मैतेई अनूसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहे हैं। नागा और कुकी का साफ मानना है कि सारी विकास की मलाई मूल निवासी मैतेई ले लेते हैं। आजादी के समय कुकी समुदाय के लोग मात्र 4 प्रतिशत थे लेकिन बाद में इनकी आबादी एकाएक बढ़ी।
मणिपुर के सीएम बिरेन सिंह ने मौजूदा हालात के लिए म्यांमार से घुसपैठ और अवैध हथियारों को ही जिम्मेदार ठहराया है। करीब 200 सालों से कुकी को स्टेट का संरक्षण मिला। बाद में अधिकतर ने इसाई धर्म स्वीकार कर लिया जिसका फायदा मिला और एसटी स्टेटस भी मिला। अब सारा बवाल इसी मामले को लेकर मचा है।
Published on:
19 Aug 2023 09:06 pm
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