जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि हाल में नार्को-आतंकवाद और मनोवैज्ञानिक युद्ध बड़े खतरे उभर रहे हैं और पुलिस को अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि हाल में नार्को-आतंकवाद और मनोवैज्ञानिक युद्ध बड़े खतरे उभर रहे हैं और पुलिस को अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा। सिन्हा ने बारामूला के उत्तरी शीरी इलाके में 510 नए रंगरूटों की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए कहा, जैसे-जैसे तकनीक दिन-व-दिन उन्नत होती जा रही है नार्को-आतंकवाद और मनोवैज्ञानिक युद्ध हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस को अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इन खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जमकर तारीफ की
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक साथ कई मोर्चों पर लड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रशंसा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रतिभा से भरी है और उसने यूटी के सम्मान एवं प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने दावा किया, पिछले तीन वर्षों में, स्थिति बहुत बदल गई है और एक आम आदमी शांतिपूर्ण जीवन जी रहा है। पर कुछ विध्वंसक तत्व शांति को बाधित करने में अपनी भूमिका निभाते रहते हैं क्योंकि वे गरीब लोगों के शांतिपूर्ण जीवन जीने से खुश नहीं हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस को इन शांति विरोधी तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए।
देश के सबसे अच्छे बलों में शुमार है जम्मू-कश्मीर पुलिस
मनोज सिन्हा ने कहा कि पुलिस एक तरफ आतंक और आतंकवाद से लड़ रही है और दूसरी तरफ कानून व्यवस्था बनाए रख रही है। पुलिस के समक्ष अन्य चुनौतियाँ भी हैं जिनमें सामाजिक अपराध, दिन-प्रतिदिन के अपराध और सामान्य पुलिसिंग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस देश के सबसे अच्छे बलों में शुमार है।
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आतंक को खत्म करना अपना अंतिम लक्ष्य
उन्होंने युवाओं को विभिन्न खेल संबंधी गतिविधियों में शामिल करने के लिए बड़े पैमाने पर सिविक एक्शन कार्यक्रम शुरू करने के लिए भी पुलिस की सराहना की। नए रंगरूटों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आपको प्रतिज्ञा लेनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि आप आतंक तथा आतंकवाद के खिलाफ लड़ेंगे। युवाओं को आतंक को खत्म करना अपना अंतिम लक्ष्य बनाना चाहिए।
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