
Navaratri: Kheer bhawani Mandir Jammu Kashmir
Navaratri 2024: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में माहौल बदला हुआ है। एक ओर लोगों ने लोकतंत्र के महायज्ञ विधानसभा चुनाव में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया, दूसरी ओर नवरात्र की तैयारियों में जुटे हैं। घाटी के बदले हालात में कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी खीर भवानी की पूजा-अर्चना के लिए उत्साहित हैं। कश्मीर घाटी में श्रीनगर से 22 किलोमीटर दूर गांदरबल जिले के तुलमूल गांव में श्री माता खीर भवानी मंदिर कश्मीरियों सहित पूरे देश के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। कहा जाता है कि यह देश का एकमात्र मंदिर है, जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजते हैं।
मंदिर के पुजारी दीपू शास्त्री बताते हैं कि मंदिर की मान्यता माता के 51 शक्ति पीठों (51 Shakti Peeth) में होती है। मां भवानी को लोग उमा देवी, महारज्ञा देवी, राज्ञा देवी और राज्ञा भवानी नाम से भी बुलाते हैं। मंदिर के सचिव दर्शन सिंह बताते हैं कि नवरात्र पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। कलश स्थापना के साथ ही हर दिन माता की विशिष्ट पूजा होती है। अष्टमी में दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ कंजक पूजन होता है। इस बार घाटी में बहुत अच्छा माहौल है तो नवरात्र को लेकर उत्साह है।
कश्मीर के लोग खीर भवानी माता को विद्या की देवी मानते हैं। कश्मीरी पंडित मंत्र विशेष के साथ माता की पूजा कर रक्षा करने और विद्या दान करने की प्रार्थना करते हैं...नमस्ते शारदा देवी, कश्मीर पुर्वासिनी। प्रार्थये नित्यं विद्या दानं च दे ही मे।।
(हे शारदा देवी, कश्मीर में रहने वाली और यहां की रक्षा करने वाली, मैं प्रार्थना करता हूं कि मुझे विद्या दान करें।)
श्री माता खीर भवानी का मंदिर झरने के बीच कुंड के मध्य बना हुआ है। इसे चमत्कारी कुंड माना जाता है। कहा जाता है जब भी कश्मीर में बड़ी आफत आने वाली होती है तो कुंड के पानी का रंग बदल जाता है। पानी आमतौर पर हरा, गुलाबी या दूधिया रहता है। मुसीबत आने पर काला हो जाता है। इसका रंग 2014 में काला हो गया था तो कश्मीर में बाढ़ आई थी। इसी तरह 1947 और 1987 में सुर्ख लाल हो गया था। इसके बाद घाटी पर हमला और आतंक फैला था। मंदिर में परिसर में रहने वाले मोहंती बताते हैं कि मां भवानी के पवित्र कुंड में हर सुबह कभी दीप, कभी चंद्रिका, कभी सर्प तो कभी मां गौरी की आंख की आकृति पानी में अपने आप बनती है। यह माता का चमत्कार है।
पौराणिक मान्यताओं कि मां खीर भवानी रावण की कुलदेवी थीं। रावण ने मां सीता का अपहरण किया तो वह कुपित हो गईं। इसके बाद हनुमानजी माता सीता को खोजते हुए हुए लंका पहुंचे। देवी ने हनुमान जी से लंका से दूसरी जगह ले जाने के लिए कहा। इसके बाद जल के रूप में उनके साथ आकर तुलमूल गांव में विराजमान हो गईं।
मंदिर में माता को विशेष रूप से खीर का भोग लगाया जाता है। इस कारण मंदिर का नाम खीर भवानी मंदिर पड़ गया। यहां हर साल ज्येष्ठ माह की अष्टमी तिथि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। वसंत के मौसम में भी खीर चढ़ाई जाती है।
Updated on:
03 Oct 2024 11:01 am
Published on:
03 Oct 2024 10:48 am
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