
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2024 परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी से संबंधित मामलों की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि एक ट्रंक को खुले ई-रिक्शा पर रखकर हजारीबाग के ओएसिस स्कूल ले जाया गया, जहां स्कूल के प्रिंसिपल ने यह ट्रंक प्राप्त किया। सीलबंद ट्रंक उन्हें दिया गया, किसी बैंक को नहीं।
वकील का कहना है कि एनटीए द्वारा NEET-UG परीक्षा आयोजित करने में व्यवस्थागत विफलता है, यह विफलता बहुआयामी है। वकील का कहना है कि प्रश्नपत्रों के परिवहन में तब समझौता हुआ जब 6 दिनों तक पेपर एक निजी कूरियर कंपनी के हाथों में थे और पेपर को हजारीबाग में ई-रिक्शा में ले जाया जा रहा था। इसे बैंक ले जाने के बजाय ड्राइवर ओएसिस स्कूल ले गया।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लीक हुए पेपर का प्रसार 3 मई से ही शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम वीडियो से मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि हल किए गए पेपर 4 मई को प्रसारित किए जा रहे थे। सोशल मीडिया की प्रकृति को देखते हुए, लीक हुए पेपर और लाभार्थियों के सटीक प्रसार का सटीक निर्धारण करना असंभव है।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी के ऐसा करने का उद्देश्य NEET परीक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर तमाशा बनाना नहीं है। लोग पैसे के लिए ऐसा कर रहे थे। इसलिए, यह परीक्षा को बदनाम करने के लिए नहीं था और कोई व्यक्ति पैसे कमाने के लिए ऐसा कर रहा था, जो अब स्पष्ट है। पेपर के बड़े पैमाने पर लीक होने के लिए उस स्तर पर संपर्कों की भी आवश्यकता होती है ताकि आप विभिन्न शहरों आदि में ऐसे सभी प्रमुख संपर्कों से जुड़ सकें। जो कोई भी इससे पैसा कमा रहा है, वह इसे बड़े पैमाने पर प्रसारित नहीं करेगा।
Published on:
18 Jul 2024 03:31 pm
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