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नेपाल बाढ़ में लापता हुई बेटी, 2 महीने बाद भी मां को इंतजार, घर में रखा है आखिरी निशानी वाला सूटकेस

Nepal Floods: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के दो महीने बाद भी 5,285 लोग लापता हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ की प्रियंका चौधरी भी शामिल हैं। मां बेटी का वीडियो बार-बार देखती हैं, जबकि भाई ने उनका सूटकेस अब तक नहीं खोला है।
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भारत

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Pratiksha Gupta

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Updated: 24 Oct 2026, 1:10 PM IST

nepal flood rescue

रेस्क्यू की गई महिला (फोटो- X@Corleoneei )

Nepal Flood Missing People: नेपाल में आई भीषण बाढ़ को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहने वाले एक परिवार का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है। 40 साल की प्रियंका चौधरी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटते समय बाढ़ में लापता हो गई थीं। उनकी मां आज भी बेटी का छह सेकंड का वीडियो बार-बार देखती हैं। वहीं, भाई के पास प्रियंका का वह सूटकेस है, जिसमें परिवार के लिए लाए गए उपहार और चॉकलेट आज भी रखे हैं। प्रियंका का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है और परिवार उनके बारे में जवाब मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।

6 सेकंड का वीडियो और उंगलियों से प्रियंका को छूने की कोशिश

प्रियंका की 63 वर्षीय मां मधु के लिए दिन का सबसे अहम और भावुक हिस्सा उनके फोन में पड़ा एक 6 सेकंड का वीडियो है। गहरे रंग की जैकेट और टोपी पहने प्रियंका टट्टू पर सवार हैं, पीछे नीला आसमान है और चेहरे पर एक खूबसूरत मुस्कान। मां मधु हर रोज उस वीडियो को बार-बार चलाकर देखती हैं। कई बार स्क्रीन को जूम करके बेटी का चेहरा करीब से देखने की नाकाम कोशिश करती हैं। प्रियंका का छोटा भाई तरुण बताता हैं कि मां को यह समझाना नामुमकिन है कि वो वीडियो न देखें। अब मैं भी उनके साथ बैठकर यही कहता हूं कि 'देखो प्रिया कितनी खुश थी, वो भगवान के पास गई है।' किसी मां से उसकी बेटी को ढूंढने का हक कैसे छीना जा सकता है?

ग्यिरोंग बॉर्डर पर आया था तबाही का सैलाब

26 अगस्त को जब ईशा फाउंडेशन का 80 लोगों का समूह कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौट रहा था, तब नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ग्यिरोंग इमिग्रेशन दफ्तर के पास अचानक पहाड़ों से बर्फ, कीचड़, पानी और भारी चट्टानों का सैलाब आ गिरा। पलक झपकते ही पूरा परिसर मलबे में तब्दील हो गया। प्रियंका वर्ष 2013 से ईशा फाउंडेशन से जुड़ी हुई थी। इस हादसे के बाद से ही उनका कोई पता नहीं चल सका है।

हॉस्पिटलों के चक्कर और 20 फीट ऊंचे मलबे की खौफनाक सच्चाई

हादसे की खबर मिलते ही प्रियंका के भाई तरुण काठमांडू पहुंचे। इस उम्मीद में कि शायद बहन किसी अस्पताल में बेहोश या सदमे में पड़ी हो। लेकिन काठमांडू के अस्पतालों ने जब सभी मरीजों की पहचान की पुष्टि कर दी, तो उनकी बची-कुची उम्मीद भी टूट गई। इसके बाद तरुण ग्राउंड जीरो पर यानी बिदुर (नुवाकोट) पहुंचे, जो हादसे वाली जगह से करीब 80 किलोमीटर दूर है। वहां का नजारा देखकर उनका कलेजा मुंह को आ गया। इमारतें तीसरी मंजिल तक 20 फीट ऊंचे मलबे में दबी थीं। तरुण कहते हैं, 'उस विशाल मलबे के आगे इंसान का वजूद बहुत छोटा लग रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि बहन को कहां ढूंढूं, दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका था।'

कमरे में रखा है बहन का अनछुआ सूटकेस

तलाश बेनतीजा रहने पर तरुण काठमांडू के होटल में छूटा प्रियंका का सूटकेस लेकर बिलासपुर लौट आए। उस सूटकेस में प्रियंका द्वारा अपने भाई के लिए खरीदी गई चॉकलेट्स, परिवार के लिए गिफ्ट्स और कपड़े रखे हैं। दो महीने निकल जाने के बाद भी परिवार ने उस सूटकेस को हाथ तक नहीं लगाया है। तरुण का कहना है कि ये वो आखिरी चीजें हैं जो प्रिया ने छुई थी, इसलिए इन्हें कोई छूता भी नहीं है।

सर्च ऑपरेशन बंद, डीएनए रिपोर्ट का इंतजार

नेपाल सरकार ने आपदा के 45 दिन पूरे होने के बाद खोज व बचाव अभियान को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है और अब ध्यान सिर्फ पुनर्निर्माण पर है। सरकार ने कानून में बदलाव कर लापता लोगों को मृत घोषित करने की समय सीमा को 12 साल से घटाकर 45 दिन कर दिया है। लापता लोगों में करीब 275 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। काठमांडू में फॉरेंसिक टीमें 3,000 से अधिक नमूनों की जांच कर करीब 1,200 डीएनए प्रोफाइल तैयार कर चुकी हैं। प्रियंका के परिवार ने भी अपना डीएनए सैंपल दे दिया है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आधिकारिक तौर पर कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।