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‘तुम्हारे चेहरे सामने आ गए, निकल जाओ’, टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में टीवी न्यूज देखकर अलर्ट कर रहे थे हैंडलर्स, ऐसे चल रहा था पुलिस से बचने का खेल

Tiger Shroff: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में खुलासा हुआ है कि शूटर्स को टीवी न्यूज देखकर पुलिस की जांच के अपडेट दिए जा रहे थे। पुलिस हैंडलर और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
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भारत

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Pratiksha Gupta

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Updated: 24 Oct 2026, 7:42 AM IST

Tiger Shroff firing news

टाइगर श्रॉफ पर हमले की एक हफ्ते पहले हुई थी कोशिश (Photo: IANS)

Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर जुहू में हुई फायरिंग के मामले में एक बड़ा और हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। 18 अक्टूबर की शाम हमला करने के बाद जब पुलिस हमलावरों को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, तब शूटर्स को पुलिस की हर हलचल का पहले से ही पता चल जा रहा था। पुलिस जांच में शक जताया गया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे बैठा मास्टरमाइंड न्यूज चैनलों पर पल-पल की खबरें देख रहा था और मैसेज व इंटरनेट कॉल के जरिए शूटर्स को अलर्ट भेज रहा था।

'तुम दोनों के चेहरे दिख गए हैं, तुरंत वहां से निकल जाओ'

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब न्यूज चैनलों पर पपराजी और व्लॉगर्स के फुटेज से मिली शूटर्स की तस्वीरें प्रसारित होनी शुरू हुई, तब उसी समय आरोपी रेहान अंसारी के फोन पर एक मैसेज आया, 'तुम्हारे चेहरे सामने आ गए हैं, वहां से निकल जाओ।'
सिर्फ इतना ही नहीं, जब पुलिस ने अंधेरी इलाके में लावारिस पड़ी हमलावरों की बाइक बरामद की और उनके ट्रेन से भागने की खबर टीवी पर आई, तो हैंडलर्स ने तुरंत उन्हें आगे का सफर बदलने का निर्देश दिया। यही वजह थी कि शूटर्स लगातार अपनी लोकेशन और गाड़ी बदल रहे थे। पहले बाइक, फिर ट्रेन, उसके बाद बोरीवली से सूरत के लिए प्राइवेट कैब और आखिर में फिर से ट्रेन पकड़ ली।

वीओआईपी कॉल्स और जांगी ऐप का इस्तेमाल

मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नॉर्मल मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया था। वे केवल वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) और बिना नंबर के चलने वाले मैसेजिंग ऐप (जैसे जांगी/सिग्नल) के जरिए अपने मुखिया से जुड़े हुए थे। यही वजह रही कि शुरुआत में पुलिस के लिए उनके डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा था क्योंकि ऐसी कॉल्स कॉल रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देती हैं। वहीं द इंडियन एक्सप्रेस ने 20 अक्टूबर को ही सबसे पहले ये खबर दे दी थी कि भागते समय आरोपियों ने मोबाइल नेटवर्क के बजाय सिर्फ इंटरनेट के जरिए कॉल की थी।

कैब ड्राइवर को की गई एक कॉल ने फंसाया

इतनी तगड़ी प्लानिंग होने के बावजूद हमलावरों से एक गलती हो गई। बोरीवली से सूरत ले जाने वाले कैब ड्राइवर को आरोपियों ने एक सामान्य फोन कॉल कर दिया। बस इसी एक नॉर्मल कॉल के आधार पर मुंबई पुलिस ने उनकी लोकेशन ट्रेस की और कोटा पुलिस की मदद से आरोपियों को राजस्थान में चलती ट्रेन से दबोच लिया।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तार, 10 गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फूल सिंह (18), रेहान रहीसुद्दीन अंसारी (18) और ऋतिक महतो (22) के रूप में हुई है, जिन्हें कोर्ट ने 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। पुलिस अब तक इस केस में कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका में बैठा गैंगस्टर अनिल पंडित या हाल ही में सोनीपत से पकड़े गए उसके गुर्गे अंकित खटक और समीर खत्री इन शूटर्स को लाइव निर्देश दे रहे थे।