
Drug law: भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को शामिल कर बने नया ड्रग कानून
नई दिल्ली. प्रख्यात वैकल्पिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विश्वरूप राय चौधरी का कहना है कि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट-1954 की जगह भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को शामिल करते हुए नया ड्रग एक्ट बनाया जाना चाहिए। अंग्रेजों का बनाया ड्रग्स एक्ट भारतीयों पर थोपा गया है। इसे बदले जाने की जरूरत है।
डॉ. विश्वरूप ने गुरुवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि असाध्य किडनी रोग का इलाज भी डायलिसिस और प्रत्यारोपण के बिना भारतीय चिकित्सा पद्धति में मौजूद है। इसे बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि असाध्य रोगों का उपचार महंगी दवा और दर्दनाक प्रक्रिया के बिना संभव है। देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां व प्राकृतिक उपचार इतने सशक्त हैं कि उसके लिए कोई भी अंग्रेजी दवा पद्धति अपनाने की जरूरत ही नहीं है।कार्यक्रम में डॉ. विश्वरूप की पुस्तक 'व्हेन क्योर इज क्राइम' का विमोचन किया गया।
इस मौके पर दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील उपाध्याय और आचार्य मनीष ने कहा कि अंग्रेजी दवाओं पर निर्भर रहने की सोच ही बेमानी है। सरकार की आयुष्मान भारत योजना पर सवाल उठाते हुए पर वक्ताओं ने कहा कि आयुष्मान में कहीं भी आयुष का नामोनिशां नहीं है। सारी दवाएं अंग्रेजी हैं। आयुष्मान भारत योजना की पुनः समीक्षा करने और आयुष चिकित्सकों की भर्ती व नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया जाना चाहिए।
डायलिसिस या प्रत्यारोपण जरूरी नहीं
डॉ बीआरसी ने कहा कि लगभग 75 प्रतिशत मरीज प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति अपनाकर डायलिसिस पर निर्भरता से मुक्त हुए हैं। गुर्दा प्रत्यारोपण भी टल गया है। डायबिटीज से पीड़ित भी निरंतर रोग से उबर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों के मरीजों से ऑनलाइन रूबरू होकर उपचार की जानकारी ली।
Published on:
28 Sept 2023 04:06 pm
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