
New Income Tax Bill: लोकसभा में आज नया आयकर विधेयक पेश किया जाएगा। आयकर विधेयक, 2025 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किये गये हैं। बिल की भाषा सरल और संक्षिप्त बनाई गई है, ताकि अनावश्यक स्पष्टीकरण और प्रावधानों को हटा दिया गया है। इसमे आय की परिभाषा को भी विस्तारित किया गया है, जिसके और उसके स्रोतों को भी शामिल किया गया है। एक बड़ा बदलाव यह है कि अब 'टैक्स ईयर' का कॉन्सेप्ट इंट्रोड्यूस किया गया है, जो 1 अप्रैल से शुरू होगा, 12 महीने का होगा, और 'असेसमेंट ईयर' का टर्म हटा दिया गया है। ये 622 पेज का बिल टैक्स प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश करता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दिया था कि इस विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा ताकि विधेयक का गहन विश्लेषण और चर्चा हो सके। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने आयकर प्रणाली में बदलाव के लिए सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार किया है और इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय लेना चाहती है। यह विधेयक आयकर प्रणाली में बदलावों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, और इसके परिणामस्वरूप करदाताओं को अधिक पारदर्शिता और सुलभता मिल सकती है।
पुराना टैक्स सिस्टम जारी रहेगा: नया बिल यह स्पष्ट करता है कि पुराने टैक्स सिस्टम को जारी रखा जाएगा, यानी टैक्सपेयर्स के पास पुराने टैक्स स्लैब के साथ अपनी कर योजना को चुनने का विकल्प रहेगा।
नई कर व्यवस्था (नई टैक्स स्लैब): नए टैक्स स्लैब में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इससे टैक्सपेयर्स के लिए कर निर्धारण की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो सकती है।
डिडक्शन्स और छूट में बदलाव: नई व्यवस्था में कुछ डिडक्शन्स और छूटों में बदलाव हो सकते हैं, जैसे कि HRA, 80C, और अन्य कर लाभों में संशोधन हो सकता है।
कंपनी टैक्स: यह बिल कंपनियों के लिए भी कुछ नई राहतें और नियम पेश कर सकता है, ताकि देश में व्यापार बढ़ सके और विदेशी निवेश आकर्षित हो।
इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में बदलाव: नई प्रक्रिया में टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइलिंग को आसान और तेजी से पूरा करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
ग्लोबल इनकम को ध्यान में रखते हुए बदलाव: कुछ टैक्सपेयर्स के लिए जो विदेश में भी कमाई करते हैं, उनके लिए कर व्यवस्था में बदलाव हो सकता है।
टैक्स निर्धारण में पारदर्शिता: नए बिल में टैक्स निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जा सकते हैं, ताकि करदाता को किसी प्रकार की उलझन का सामना न हो।
अगला कदम - टैक्स व्यवस्था का डिजिटलीकरण: बिल के अंतर्गत भारत में टैक्स प्रणाली के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए उपाय किए जा सकते हैं, जिससे टैक्सपेयर्स को ऑनलाइन सुविधाएं मिल सकें।
लघु व्यापारियों के लिए राहत: छोटे और मझोले व्यवसायों (SMEs) के लिए भी कुछ राहत दी जा सकती है, जैसे टैक्स स्लैब में छूट या व्यावसायिक खर्चों को कर में शामिल करने की छूट।
कृषि क्षेत्र में टैक्स छूट: कृषि क्षेत्र से संबंधित कर व्यवस्था में भी कुछ राहत दी जा सकती है, ताकि किसानों को और प्रोत्साहन मिल सके।
Updated on:
13 Feb 2025 09:12 am
Published on:
13 Feb 2025 08:03 am
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