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नई कृषि क्रांति की तैयारी…ड्रोन, एआइ और रोबोट से होगी नई खेती

जय किसान : नीति आयोग ने तैयार किया रोडमैप, लागत घटेगी, किसान की आय बढ़ेगी

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भारत

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Kanaram Mundiyar

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@Krmundiyar

Nov 05, 2025

यदि केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है।

नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी।

फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक

ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर।

सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट।

ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म।

रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर।

जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में।

प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत।

वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग।

हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल।

एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद।

बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’।

साल दर साल ऐसे कदम

वर्ष --लक्ष्य --- यह होगा

2026- पायलट प्रोजेक्ट - 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर

2027- डिजिटल पहुंच - 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे

2028 --ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक

2029---रोबोट क्रांति--- 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय

2030---स्मार्ट विलेज---हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी

किसानो को ऐसे लाभ

आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए

लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा)

उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा

पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स)

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बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन)

फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर :

कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए

ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग।

एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी।

फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को

रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा।

सब साथ आएंगे होंगे सफल

यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत विश्व का अन्न भंडार बने।

-बी.वी.आर.सुब्रह्मण्यम, सीईओ, नीति आयोग

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