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नितिन नवीन ने अपनी टीम में टीम मोदी से लिया एक आदमी, क्या कैबिनेट से बाहर किए जाएंगे हर्ष मल्होत्रा?

बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इस फैसले के बाद मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल की आशंका बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह बीजेपी का एक व्यक्ति, एक पद नियम माना जा रहा है।

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भारत

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Himadri Joshi

May 29, 2026

Nitin Naveen and Harsh Malhotra

नितिन नवीन और हर्ष मल्होत्रा (फोटो- हर्ष मल्होत्रा एक्स पोस्ट)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को कई राज्यों में संगठनात्मक बदलावों की घोषणा की, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान दिल्ली इकाई पर गया। हर्ष मल्होत्रा फिलहाल केंद्र सरकार में कॉरपोरेट कार्य, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है।

बीजेपी में एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत

हर्ष मल्होत्रा ने वीरेंद्र सचदेवा की जगह दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष का पद संभाला है। वह पूर्वी दिल्ली से लोकसभा सांसद भी हैं। बीजेपी के संविधान में एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत लंबे समय से लागू माना जाता रहा है। इससे पहले राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे नेताओं ने संगठन और सरकार में एक साथ जिम्मेदारी नहीं निभाई थी। हालांकि पार्टी संविधान में यह स्पष्ट नहीं है कि कोई नेता कितने समय तक दोनों पदों पर बना रह सकता है। उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी इसका उदाहरण हैं, जो अभी भी केंद्र में वित्त राज्य मंत्री बने हुए हैं।

सहयोगी दलों को मिल सकता है ज्यादा प्रतिनिधित्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हर्ष मल्होत्रा की नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं बल्कि संभावित कैबिनेट फेरबदल का संकेत भी हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रिपरिषद की बैठक में कई मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की थी। जून के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की बैठक भी प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि सरकार अपने सहयोगी दलों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर विचार कर सकती है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) जैसे सहयोगियों का अभी केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं है, जिससे फेरबदल की संभावना और मजबूत मानी जा रही है।

आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर भी लिया जा सकता है फैसला

बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर भी रणनीति बना रही है। 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश समेत सात राज्यों में चुनाव होने हैं। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर नई टीम तैयार कर सकती है। जून में राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव भी होने वाले हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से कई सीटें खाली होंगी। इससे ऐसे नेताओं को संसद पहुंचाने का रास्ता खुलेगा जो अभी सांसद नहीं हैं लेकिन भविष्य में मंत्रिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे में हर्ष मल्होत्रा की नई जिम्मेदारी को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।