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NLFT-ATTF Protest: ट्रेन का रास्ता रोक पटरी पर बैठ गए बैन मिलिटेंट ग्रुप ATTF और NLFT, धरने के कारण सड़क मार्ग भी ठप

NLFT-ATTF Protest Rail Blockade: बैन उग्रवादी संगठन ATTF और NLFT के लौटे सदस्यों ने पुनर्वास के सरकार के अधूरे वादों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया, जिससे यातायात प्रभावित हो गया है।

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भारत

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Saurabh Mall

Jun 12, 2026

NLFT-ATTF Protest Rail Blockade

धरने पर बैठे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ATTF और NLFT के आत्मसमर्पण कर चुके सदस्य (सोर्स: आईएएनएस)

Surrendered Militants NLFT-ATTF Protest: त्रिपुरा में हालात तनावपूर्ण है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ‘ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स’ (ATTF) और ‘नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा' (NLFT) के आत्मसमर्पण कर चुके सदस्यों ने 72 घंटे का सड़क और रेल ब्लॉकेड शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर बैठकर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी, जबकि कई प्रमुख सड़कों पर भी यातायात प्रभावित हुआ।

क्या है मांग?

उनका आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार ने दो साल पहले हुए शांति समझौते के तहत पुनर्वास, रोजगार, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का वादा किया था, लेकिन अब तक कई मांगें पूरी नहीं हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने पहले ही प्रशासन को नोटिस दिया था और सरकार के साथ बातचीत भी हुई, लेकिन उससे उन्हें संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना।

‘NLFT’ सदस्य थॉमस उचॉय ने कहा कि विरोध के बारे में हमने 7 दिन पहले नोटिस दिया था। विकास मंत्री से भी बातचीत हुई लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसलिए सड़क पर धरना दे रहे हैं।

बता दें ‘ATTF’ और ‘NLFT’ भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में सक्रिय दो प्रमुख उग्रवादी संगठन थे। दशकों के हिंसक संघर्ष के बाद, इन समूहों ने मुख्यधारा में जुड़ने के लिए हथियार छोड़ केंद्र व राज्य सरकार के साथ शांति समझौता दो साल पहले 4 सितंबर, 2024 को किया था।

हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण

बता दें 4 सितंबर, 2024 को शांति समझौते पर साइन करते हुए दोनों संगठनों के 328 कैडर मुख्यधारा में शामिल हुए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 10,000 से अधिक उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करते हुए मुख्यधारा में शामिल हैं।

असम के उग्रवादी संगठन ULFA भी कर चुका है शांति समझौता

ठीक इसी तरह 29 दिसंबर 2023 को ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम’ (ULFA) ने केंद्र सरकार और असम सरकार के साथ आत्मसमर्पण करते हुए शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत संगठन ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने पर सहमति जताई थी।

बता दें यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा की मौजूदगी में हुआ। समझौते का असर जल्द ही दिखाई देने लगा। ULFA के करीब 700 कैडरों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया और सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया।