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पॉक्सो में सहमति की उम्र घटाने के मामले में केंद्र को नोटिस जारी

- बचपन बचाओ आंदोलन ने दायर की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

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पॉक्सो में सहमति की उम्र घटाने के मामले में केंद्र को नोटिस जारी

पॉक्सो में सहमति की उम्र घटाने के मामले में केंद्र को नोटिस जारी

नई दिल्ली। पॉक्सो में सहमति की उम्र घटाने की कतिपय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मांग और देश की विभिन्न अदालतों के फैसलों में इस मांग के प्रति दिखती नरमी के खिलाफ बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार व संबद्ध पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि इस मांग से देश में बड़ी संख्या में यौन शोषण के शिकार बच्चों और खास तौर से लड़कियों के हितों पर गंभीर असर पड़ेगा।

बीबीए की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम-2012 (पॉक्सो) के मामलों में 'सहपलायन और प्रणय संबंधों' की अनुचित व्याख्या कानून की भावना और उद्देश्य का ही अवमूल्यन कर रही है। पॉस्को के 60 से 70 प्रतिशत मामलों में सहमति से संबंध को लेकर विभिन्न गैरसरकारी संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दावे तथ्यात्मक नहीं हैं। तथ्यों की गलत व्याख्या करके दावा किया गया है कि ऐसे मामलों में 60 से 70 प्रतिशत मुकदमे 'सहमति से बने प्रणय संबंध' की श्रेणी में आते हैं। बीबीए ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि पॉक्सो के तहत मामलों 16 से 18 आयु वर्ग के बीच के किशोरों के मामलों की संख्या महज 30 फीसदी है। याची ने सहायक व्यक्तियों (सपोर्ट पर्संस) से एक सर्वे भी कराया है। इसमें पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में सिर्फ 13 फीसदी में कथित रूप से सहमति का तथ्य उजागर हुआ है।

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी.वी. चंद्रचूड़, न्यायाधीश जे.बी. पारदीवाला व न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एच. एस. फूल्का व अन्य अधिवक्ताओं ने बीबीए की ओर से दलीलें पेश की। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए केंद्र व अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।